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गुजरात के मुस्लिम वोटर अलग- थलग रहकर भी कांग्रेस के साथ है

अहमदाबाद। पूर्वी सूरत के विधानसभा क्षेत्र 159 से वरिष्ठ कांग्रेस नेता सलीम भाई पटेल पूछते हैं, ‘यह गुजरात है या उत्तर प्रदेश?’ वह कांग्रेसी नेताओं द्वारा गुजराती वोटरों के संप्रदायों में बांटे जाने के बारे में बात कर रहे हैं.

एक ओर हार्दिक पटेल हैं जो कि पाटीदारों को कांग्रेस के पक्ष में लाने में जुटे हुए हैं, दूसरी ओर, अल्पेश ठाकुर ओबीसी और जिग्नेश मेवानी दलित नेता के तौर पर उभरे हैं. इन तीन युवा तेज तर्रार नेताओं के कांग्रेस की तरफ झुकाव से गुजरात में पार्टी की जीत की उम्मीदें पैदा हो रही हैं. राहुल गांधी नरम हिंदुत्व का सहारा लेते हुए पूरे गुजरात में एक के बाद एक मंदिरों में जा रहे हैं.

पिछले 22 साल से गुजरात पर बीजेपी का शासन है. ऐसे में सपोर्ट के लिए मुस्लिम वोटरों को कांग्रेस में एकमात्र उम्मीद नजर आ रही थी. अब पार्टी का ध्यान दूसरे समूहों पर बढ़ने के साथ मुस्लिम समुदाय में असुरक्षा की भावना घर कर रही है. दक्षिणी गुजरात में पहले चरण में 9 दिसंबर को चुनाव होने हैं और 21 नवंबर नामांकन पत्र दाखिल करने की आखिरी तारीख है.

सलीम के विधानसभा क्षेत्र 159 में 2.6 लाख वोटरों में करीब 92,000 मुस्लिम हैं. कुछ दिन पहले इसी इलाके के नानपुरा के चौक बाजार जैसी जगहों पर कांग्रेस विरोधी पोस्टर नजर आए. इन पोस्टरों में कांग्रेस को संदेश दिया गया था कि अगर पार्टी मुस्लिमों को प्रतिनिधित्व नहीं देगी तो उसे मुस्लिम वोट भी नहीं मिलेंगे.

हालांकि, स्थानीय कांग्रेस नेताओं द्वारा समझाए जाने पर इन पोस्टरों को हटा लिया गया. लेकिन, माहौल में तनाव नजर आ रहा है क्योंकि इस बात के कयास हैं कि कांग्रेस सूरत वेस्ट से किसी मुस्लिम उम्मीदवार को उतार सकती है.

इस इलाके में करीब 5,000 से 10,000 मुस्लिम हैं. इस इलाके में रहने वाले और करीब एक दशक से कांग्रेस से जुड़े हुए मुकद्दर रंगूनी कहते हैं, ‘इस इलाके से मुस्लिम कैंडिडेट जीत सकता है. हमारे लिए अपने प्रतिनिधित्व को जिंदा रखना जरूरी है. बीजेपी हमारी मौजूदगी से ही इनकार करती है. उनकी पार्टी से कोई यहां नहीं आया.

यहां तक कि बाढ़ के दौरान सड़कों पर जलभराव होने पर भी कोई यहां नहीं आया. यहां के लोगों ने गुजरात पर शासन करने वाले विधायकों, सांसदों की शक्ल तक नहीं देखी है. इन लोगों के लिए उम्मीद की एकमात्र किरण कांग्रेस है और अगर वे हमें निराश करेंगे तो इसके बुरे परिणाम निकल सकते हैं.’

रंगूनी के घर तक पहुंचने के लिए आपको गलियों से होकर गुजरना पड़ता है जहां पर फर्नीचर, टायर और कबाड़ी वालों की दुकानें सड़कों तक पसरी हुई हैं. गलियां ग्रीस, मुर्गे-मुर्गियों के पंखों की गंदगी से पटी हुई हैं और बकरियां इधर-उधर बैठी नजर आती हैं. इस इलाके में अकेले मुकद्दर ही नाखुश नहीं हैं.

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