Thursday , July 19 2018

नई तकनीक से इराकी महिला के लीवर को उसके ढाई साल के बच्चे को प्रत्यारोपित किया

नई दिल्ली। दिल्ली के चिकित्सकों ने हाल ही लीवर प्रत्यारोपण करने के लिए पहली बार लैप्रोस्कोपिक डोनर हेपटेक्टोमी तकनीक से सफल सर्जरी की है। यह पहली आधुनिक सर्जरी है, जिसमें लीवर दान करने वाले के शरीर पर काटने के निशान नहीं बनते।

इस तकनीक का इस्तेमाल फोर्टिस के डॉक्टरों ने इराक के बच्चे पर किया है। इस बारे में फोर्टिस हेल्थकेयर लीवर प्रत्यारोपण विभाग के निदेशक डॉक्टर विवेक विज ने बताया कि इराक के ढाई वर्षीय अली बहा हुसैन लीवर की ‘ग्लाइकोजेन स्टोरेज डिसीज’ नाम की बीमारी से पीड़ित था जिसके कारण उसका विकास थम गया था।

उसकी 23 वर्षीय मां ने लीवर दान करने की इच्छा जताई जिसके बाद उनकी ‘लेफ्ट लैटरल हेपेक्टोमी’ की गई, जिसमें उनके लीवर के एक हिस्से को निकाला गया। 27 अप्रैल को चिकित्सकों की 10 घंटे की कड़ी मेहनत के बाद यह सफल प्रत्यारोपण हुआ।

डॉ. विवेक विज ने बताया कि सामान्य स्थिति में लीवर प्रत्यारोपण से शरीर के हिस्से पर कट के निशान बन जाते हैं, लेकिन इस तकनीक से नहीं बनते। उन्होंने बताया कि अभी तक यह सर्जरी कोरिया एवं फ्रांस जैसे देशों में होती थी। डॉक्टर विवेक विज के मुताबिक, पारंपरिक सर्जरी के मुकाबले इस सर्जरी में मरीज जल्द स्वस्थ हो जाता है।

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