Monday , September 24 2018

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने यूपी सरकार माँगा जवाव,पूछा- शिक्षकों की भर्ती में उर्दू भाषा क्यों नहीं?

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 65500 सहायक अध्यापकों की भर्ती परीक्षा में उर्दू भाषा को शामिल नहीं करने पर राज्य सरकार से जवाब मांगा है। यह आदेश न्यायमूर्ति अजय भनोट ने मोहम्मद मुंतसिम की याचिका पर अधिवक्ता सीमांत सिंह को सुनकर दिया है।
कोर्ट ने भर्ती परीक्षा 12 मार्च को होने के कारण राज्य सरकार को सात मार्च तक जानकारी देने को कहा है।

याचिका के अनुसार याची उर्दू से बीटीसी उत्तीर्ण है। उसने टीईटी 2017 में भी उर्दू भाषा ली लेकिन नौ जनवरी 2018 को विज्ञापित 65500 शिक्षकों की भर्ती परीक्षा में संस्कृत, हिन्दी व अंग्रेजी ही है। उर्दू को नही रखा गया है। याची का कहना है कि वह उर्दू के अलावा दूसरी भाषा चुनने में असमर्थ है क्योंकि उसने दूसरा कोई विकल्प लिया ही नहीं था।

यह भी कहा गया की इस परीक्षा में संस्कृत विषय चुनने वालों को लाभ होगा क्योंकि संस्कृत बीटीसी व टीईटी के साथ शिक्षक भर्ती के पाठ्यक्रम में भी है। इससे याची के समानता के अधिकार का हनन हो रहा है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि उर्दू भाषा को बहिष्कृत करना भेदभावपूर्ण है और अधिसूचना अवैध है।

याचिकाकर्ता ने अदालत से अनुरोध किया कि वह या तो राज्य सरकार को सहायक शिक्षक की भर्ती के लिए उर्दू भाषा के पत्र में शामिल होने के लिए निर्देशित करे अथवा परीक्षा अधिसूचना के सीधे रद्द करने का निर्देश दे।

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