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पैगम्बर मुहम्मद (सल्ल.) के समय से ही पवित्र काबा की चाबी उस्मान के परिवार के पास

काबा अल्लाह का घर है और संपूर्ण मुस्लिम दुनिया में इसका खासा महत्व है। पैगंबर मुहम्मद (सल्ल.) ने काबा की चाबी को सहाबी हज़रत उस्मान बिन तलहा (रह.) को सौंप दी थी। बहुत सारे लोग पैगंबर मुहम्मद (सल्ल.) के पास आए और चाबी की सुरक्षा में रुचि दिखाई लेकिन उन्होंने उस्मान बिन तलहा को सौंपी।

पवित्र काबा के दरवाजे की चाबी आज भी उस्मान बिन तलहा (रह.) के परिवार के पास है। काबे की चाबी मोहर्रम के महीने में एक बार और एक बार शाबान के पहले दिन में केवल दो बार प्रयोग की जाती है।

उस्मान बिन तलहा (रह.) के परिवार को अब सदिन के रूप में जाना जाता है यह नाम किसी का भी हकदार है जो काबा की चाबी का रक्षक है। सदिन मूल रूप से अल-शाबी परिवार से संबंधित हैं जो इस्लामी काल के अस्तित्व के लिए लंबे समय से पता लगा सकते हैं।

जब पैगंबर मुहम्मद (सल्ल.) जब जीवित थे तब उनके साथी अब्दुल्ला बिन अब्बास जो ज़मज़म के प्रभारी भी थे, उन्होंने पैगंबर से कहा कि उन्हें काबा के महत्वपूर्ण रखरखाव की जिम्मेदारी सौंपनी चाहिए। पैगंबर मुहम्मद (सल्ल.) ने नम्रता से इनकार कर दिया और अपने साथी उस्मान बिन तलहा (रह.) को इस ज़िम्मेदारी का हकदार बताया।

गौरतलब है कि पहले काबा हर हफ्ते में सोमवार और गुरुवार दो को बार खोला जाता था। अब ग़ुस्ल देने के लिए वर्ष में केवल दो बार खोला जाता है। इसको ग़ुस्ल देना एक पवित्र कार्य है और इसमें इस्लामिक देशों के राजदूत, इस्लामी अधिकारियों के साथ अन्य मेहमान भी शामिल होते हैं। इस दौरान काबा को ज़मज़म, गुलाब के पानी के साथ ग़ुस्ल दिया जाता है।

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