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लोकल ट्रेन चलाने वाली पहली मुस्लिम महिला ड्राइवर को राष्ट्रपति ने दिया नारी शक्ति पुरस्कार

मुंबई: मोटरवुमेन के नाम से मशहूर मुमताज एम काजी (45) जिन्हें तीन साल पहले एशिया का पहली महिला डीजल इंजन चालक होने का गौरव प्राप्त हुआ था, बुधवार को राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने उन्हें ‘नारी शक्ति पुरस्कार’ से सम्मानित किया। नारी शक्ति पुरस्कार के रूप में उन्हें 1 लाख रुपये नकद और प्रमाण पत्र प्रदान किया गया। इस साल विभिन्न क्षेत्रों से सात शीर्ष महिलाओं को इस पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने कहा कि आधुनिक भारत में लिंग पूर्वाग्रहों का कोई स्थान नहीं है, यहाँ सम्पूर्ण विकास महत्वपूर्ण उद्देश्य है। इस मौके पर 31 विजेताओं को सम्मानित किया गया जिनमें इसरो के वैज्ञानिक, कथकली नर्तकियों की पहली महिला मंडली, भारत की पहली महिला ग्राफिक उपन्यासकार, एसिड हमले और तस्करी से जीवित बची महिला, पर्यावरण और पशु प्रेमी कार्यकर्ता समेत अन्य भी शामिल थे।
मुमताज काज़ी को कई तरह की रेलगाड़ियों के परिचालन में महारत हासिल है। वर्तमान में वह मुम्बई के छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस-ठाणे खंड पर मध्य रेलवे की उपनगरीय लोकल ट्रेन को चलाती हैं, जो कि महिला चालक द्वारा चलाए जानेवाला अब तक का भारत का पहला और सबसे भीड़भाड़ वाला रेलवे मार्ग है। वह एक रूढ़िवादी मुस्लिम परिवार से है जो 25 साल से ट्रेन इंजन की चालक रही हैं।
हालांकि यह सब उसके लिए आसान नहीं था लेकिन उसने कर दिखाया। उनका विरोध करने वाला पहले व्यक्ति उनके पिता अल्लारखू इस्माइल काथवाला थे, जो एक वरिष्ठ रेलवे कर्मचारी थे। अब पूरा परिवार मुमताज पर गर्व करता है। वह सायन में रहती हैं। उन्होंने नंदुरबार के एक इंजीनियर मकसूद काजी से शादी की है, जिससे उनके 14 वर्षीय बेटा तौसीफ और 11 वर्षीय फतेन हैं।

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