जानिए, धारावी ने कोरोना को कैसे मात दिया?

जानिए, धारावी ने कोरोना को कैसे मात दिया?

एशिया के सबसे बड़े स्लम इलाकों में से एक धारावी से अच्छी खबर है। यहां कोरोना की रफ्तार पर ब्रेक के साथ डेथ रेट में भी काफी सुधार हुआ है।

 

धारावी में 12 जून के बाद कोरोना के किसी मरीज की मौत नहीं हुई है। धारावी की झुग्गियों में तकरीबन 10 लाख आबादी रहती है। यहां एक वर्ग किलोमीटर इलाके में आबादी का घनत्व 2.27 लाख है।

 

ऐसे में धारावी में कोरोना के मामलों में गिरावट को अच्छा संकेत माना जा रहा है।

बीएमसी के जी नॉर्थ वॉर्ड के असिस्टेंट कमिश्नर किरण दिघावकर ने बताया कि पिछले 4 दिन में कोई नई डेथ नहीं हुई है। साथ ही कोरोना मरीजों की संख्या में भी मामूली बढ़ोतरी हो रही है।

इसे रोकने का हम प्रयास कर रहे हैं। जून में धारावी में कोरोना की रफ्तार पर ब्रेक लगा है। 30 मई के बाद 9 मई को धारावी में कोरोना से 2 लोगों की डेथ हुई थी।

 

इसके बाद 11 जून को 2 और 12 जून को 2 लोगों की कोरोना से मौत हुई थी। इस तरह धारावी में अब तक 77 लोग कोरोना संक्रमण की वजह से अपनी जान गंवा चुके हैं।

 

16 जून को धारावी में कोरोना से किसी की मौत नहीं हुई, जबकि 21 नए मामले सामने आए। इस तरह धारावी में अब कुल मरीजों की संख्या 2,089 तक पहुंच गई है।

 

कोरोना जंग में धारावी मॉडल की काफी चर्चा हो रही है। धारावी में जब कोरोना के मामले बढ़ना शुरू हुए तो पूरा इलाका कंटेनमेंट जोन बन गया।

 

उसके बाद से प्रशासन ने जैसा काम किया, उसने पूरी तस्वीर ही बदलकर रख दी। अप्रैल से अब तक 47,500 घरों में जाकर अधिकारी लोगों के शरीर के तापमान और ऑक्सिजन की जांच कर चुके हैं।

 

सात लाख से ज्यादा लोगों की अब तक स्क्रीनिंग हो चुकी है। जिनमें थोड़े-बहुत लक्षण दिखे, उन्हें क्वारंटीन सेंटर बनाए गए स्कूलों और स्पोर्ट्स क्लबों में भेज दिया गया।

 

धारावी में इस अभियान की अगुआई कर रहे बृहन्मुंबई महानगर पालिका (बीएमसी) के असिस्टैंट कमिश्नर किरण दिघावकर का कहना है, ‘धारावी में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना लगभग असंभव था।

 

यहां कोरोना संक्रमित पाए जाने का इंतजार करने से बेहतर उपाय, इसको चेज करना था। हमने रिऐक्टिव होने की बजाय प्रोऐक्टिव स्ट्रैटिजी अपनाई।’

 

उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया था कि मामले भले ही कितने भी बढ़ जाएं, स्क्रीनिंग और टेस्टिंग जारी रहेगी, जिससे मौत के मामले कम किए जा सकें।

 

दिघावकर आगे कहते हैं, ‘हम शुरुआती स्टेज पर ही लोगों को आइसोलेट करने में कामयाब रहे। जबकि मुंबई के अन्य इलाकों में ज्यादातर मरीज लास्ट स्टेज पर अस्पताल पहुंच रहे हैं।’

 

इस रणनीति ने ना सिर्प मौत के आंकड़े कम किए, बल्कि रिकवरी स्पीड भी बढ़ा दी।

 

अब आलम यह है कि धारावी के 51 पर्सेंट कोरोना संक्रमित अब ठीक हो चुके हैं जबकि मुंबई में यही रेट 41 पर्सेंट का है। मई में जहां हर दिन लगभग 60 मामले आ रहे थे, वहीं अब हर दिन लगभग 20 मामले सामने आ रहे हैं।

 

साभार- नवभारत टाइम्स

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