जिस ख़बर को पढ़कर अरुंधती पर भड़के थे परेश रावल, वो फ़र्ज़ी निकली

जिस ख़बर को पढ़कर अरुंधती पर भड़के थे परेश रावल, वो फ़र्ज़ी निकली

बीजेपी सांसद और अभिनेता परेश रावल भले ही अपना ट्वीट डिलीट कर दिया हो लेकिन विवाद ख़त्म नहीं हुआ है । परेश रावल ने बुकर विजेता अरुंदति रॉय को लेकर आपत्तिजनक ट्वीट किया था । दरअसल इस ट्वीट के पीछे वो खबर थी जिसमें अरुंदति रॉय के श्रीनगर में दिए गए एक इंटरव्यू देने और पाकिस्तान का समर्थन करने की बात थी । लेकिन अरुंदति रॉय के इंटरव्यू की ख़बर फर्जी निकली है ।

सीएनएन-आईबीएन टीवी चैनल पर सोमवार रात को हुई एक लाइव बहस में एंकर भूपेंद्र चौबे ने बताया कि परेश रावल का ये बयान अरुंधति के दिए एक इंटरव्यू की वजह से आया है और इसके बाद उन्होंने एक फेसबुक पेज का वो लिंक दिखाया, जिसके बाद परेश ने ट्विटर पर ज़हर उगलना शुरू किया था.

सोमवार रात को द वायर से बात करते हुए अरुंधति ने कहा, ‘ये सब बकवास है.’ उन्होंने यह भी बताया कि वे बीते समय में कश्मीर गई ही नहीं है और न ही कश्मीर पर कोई बयान दिया है. कश्मीर पर आखिरी बार उन्होंने पिछले साल एक छोटा लेख आउटलुक के लिए लिखा था.

परेश द्वारा किया गया ट्वीट ‘द नेशनलिस्ट’ नाम के एक फेसबुक पेज का लिंक था, जिसमें लिखा था, ‘70 lakh Indian Army cannot defeat Azadi gang in Kashmir: Arundati Roy gives statement to Pakistani newspaper!’ (70 लाख की भारतीय सेना कश्मीर के आज़ादी गैंग को नहीं हरा सकती: अरुंधति रॉय ने पाकिस्तानी अख़बार को बयान दिया)

इस फेसबुक पोस्ट का स्रोत एक दक्षिणपंथी वेबसाइट postcard.news थी, जो फेक न्यूज़ चलाने के लिए जानी जाती है. इस वेबसाइट पर इसी हेडिंग से यह ख़बर 17 मई को प्रकाशित की गई थी. स्टोरी पर बाइलाइन में ऐश्वर्या एस नाम दिया गया था.

https://www.facebook.com/TheIndianNationalist/posts/1522902211105979

वेबसाइट की ख़बर में लिखा था कि ‘ये महिला जो खुद को पत्रकार और मानवाधिकार कार्यकर्ता बताती है, दशकों से आतंकवादियों के साथ खड़ी है. हाल ही में एक पाकिस्तानी अख़बार टाइम्स ऑफ इस्लामाबाद को इंटरव्यू दिया है, जहां उन्होंने आतंकियों के ख़िलाफ़ भारत सरकार के कार्रवाई करने पर उसकी आलोचना की है.

उन्होंने कहा, ‘भारत कभी भी घाटी पर कब्ज़ा करने के इरादे में कामयाब नहीं हो पाएगा भले ही उसकी सेना 7 लाख से 70 लाख हो जाए. आगे यह भी कहा कि कश्मीरी दशकों से अपने भारत-विरोधी रवैये को लेकर दृढ़ हैं.’

हालांकि पोस्टकार्ड.न्यूज़ द्वारा इसका स्रोत का कोई लिंक नहीं दिया गया, पर उसी दिन ऐसा ही एक लेख हिंदुत्ववादी एक और फेक न्यूज़ वेबसाइट satyavijayi.com पर प्रकाशित हुआ, जिस पर ‘आनंद’ नाम की बाइलाइन दी गई थी. एक तीसरी हिंदुत्ववादी फेक न्यूज़ वेबसाइट theindianvoice.com समान लेख अंकिता के नाम की बाइलाइन के साथ छापा.

कुछ और फेक न्यूज़ वेबसाइट जैसे theresurgentindia.com, revoltpress.com, virathindurashtra.com पर भी इसी तरह के लेख थे. वहीं internethindu.in नाम की वेबसाइट ने इस लेख का थोड़ा अलग वर्ज़न प्रकाशित किया, जहां उन्होंने टाइम्स ऑफ इस्लामाबाद के स्रोत का लिंक भी दिया था.

टाइम्स ऑफ इस्लामाबाद एक राष्ट्रवादी पाकिस्तानी वेबसाइट है न कि अख़बार. इस वेबसाइट में 16 मई को डेटलाइन में श्रीनगर लिखते हुए एक ख़बर प्रकाशित की गई थी, जिसका हेडिंग था ‘Even 70 lakh Indian Army cannot defeat Kashmiris: Arundhati Rai’ (70 लाख की भारतीय सेना भी कश्मीरियों को नहीं हरा सकती: अरुंधति रॉय) इस आर्टिकल में स्रोत ‘न्यूज़ डेस्क’ लिखा था, जिससे ये बताने की कोशिश की गई थी कि श्रीनगर के हालिया दौरे पर अरुंधति ने यह बयान दिया था. यहां लिखा था:

‘श्रीनगर के अपने हालिया दौरे में उन्होंने कहा कि भारत कभी भी घाटी पर कब्ज़ा करने के इरादे में कभी कामयाब नहीं हो पाएगा भले ही उसकी सेना 7 लाख से 70 लाख हो जाए. आगे यह भी कहा कि कश्मीरी सालों से अपने भारत-विरोधी रवैये को लेकर दृढ़ हैं. उन्होंने भारत सरकार का मज़ाक उड़ाते हुए यह भी कहा कि उन्हें ऐसी सरकार पर दया आती है जो लेखकों को उनके विचार अभिव्यक्त करने से रोकती है और नाइंसाफी के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने वालों को जेल में डाल देती है, वहीं भ्रष्टाचारी, बलात्कारी और अपराधी खुले घूमते हैं.’

रेडियो पाकिस्तान ने भी 16 मई को एक आर्टिकल साझा किया जिसका शीर्षक था ‘अरुंधति रॉय ने अधिकृत कश्मीर में भारतीय हमले को शर्मनाक बताया.’ रेडियो पाकिस्तान और टाइम्स ऑफ इस्लामाबाद दोनों ही ने कहीं भी अरुंधति के इस बयान का स्रोत नहीं बताया. वही पाकिस्तान के जियो टीवी की वेबसाइट में अरुंधति के बयान का स्रोत ‘कश्मीर मीडिया सर्विस’ को बताया.

कश्मीर के पत्रकारों के मुताबिक कश्मीर मीडिया सर्विस कोई मीडिया संस्थान नहीं है बल्कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के आतंकी संगठन का प्रचार करता है. कश्मीर मीडिया सर्विस की वेबसाइट तो है पर उस वेबसाइट पर अरुंधति के इस इंटरव्यू या बयान से संबंधित कोई ख़बर नहीं है.

इसके बाद पाकिस्तान के एआरवाई चैनल में भी अरुंधति के बयान को दिखाया, जिसके आधार पर मयंक सिंह ने एक अमेरिकी वेबसाइट फेयर आब्जर्वर पर एक लेख लिखा, जहां उन्होंने अरुंधति के इस तरह का बयान देने पर ग़ुस्सा ज़ाहिर किया.

मयंक सिंह का यही लेख एक और वेबसाइट न्यूज़लॉन्ड्री ने भी प्रकाशित किया. सोमवार 22 मई को सीएनएन-आईबीएन चैनल पर हुई बहस में भाजपा प्रवक्ता ने अरुंधति के बयान का स्रोत बताते हुए मयंक सिंह के इसी लेख का हवाला दिया, जिसे एंकर भूपेंद्र चौबे ने भी सही बताया.

इस तरह सरहद के दोनों तरफ ग़ुस्से और उन्माद में भरी इस तरह की न्यूज़ रिपोर्टिंग के बीच सच यह है कि अरुंधति रॉय हाल ही में कश्मीर गई ही नहीं और न ही किसी इंटरव्यू में इस तरह का कोई बयान ही दिया, जिसका आरोप उन पर लगाया जा रहा है.

अरुंधति लंबे समय से भारत सरकार की जम्मू कश्मीर नीतियों की आलोचक रही हैं. 2010 में उनके बयान कि कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा नहीं है पर विवाद खड़ा हुआ था और सरकार ने उन पर राजद्रोह का मुकदमा चलाने की भी सोची थी, हालांकि बाद में ऐसा नहीं हुआ. पिछले साल आउटलुक के लिए लिखे गए अपने लेख में उन्होंने बुरहान वानी की मौत के बाद राज्य में हो रही हिंसा को ख़त्म करने का अनुरोध करते हुए बातचीत के ज़रिये घाटी में अमन लाने की बात कही थी.

अरुंधति के बिना कश्मीर जाए, बिना कोई इंटरव्यू या बयान देने के बावजूद उठ खड़ा हुआ यह विवाद दिखता है कि किस तरह छुपे हुए राजनीतिक एजेंडा के तहत झूठी ख़बरें बनाई और फैलाई जाती हैं.

इस तरह की फेक न्यूज़ का शिकार बनने वालों में बड़े-बड़े नाम शामिल हैं. मशहूर एंकर अरनब गोस्वामी इसी श्रेणी में शामिल हैं, जो एनडीए नेता और सांसद राजीव चंद्रशेखर के नए समाचार चैनल ‘रिपब्लिक’ के प्राइम टाइम एंकर हैं. उन्होंने अपने कार्यक्रम में अरुंधति पर हमला करते हुए उन्हें ‘one-book whiner wonder’ (एक किताब लिखने और हमेशा शिकायत करने वाली) कहा.

‘वे भारतीय सेना को तरह-तरह के नामों से बुलाते हैं, वे सब साथ में आते हैं, ख़ासतौर पर लुटियंस मीडिया, झूठी नकली उदारवादियों की भीड़… वे हमारी सेना को गाली देने के लिए साथ आते हैं, एक पूर्व नियोजित तरीके से मिलकर. अब एक क़िताब लिखकर मशहूर हुई हमेशा शिकायत करने वाली अरुंधति रॉय सामने आई हैं, जिन्होंने भारतीय सेना पर सवाल उठाए हैं.’

कुछ फर्जी न्यूज वेबसाइट अपना एजेंडा फैलाने के लिए इस तरह की फर्ज़ी खबरें फैलाती हैं, इससे पहले एक वेबसाइट जेएनयू छात्रसंघ की कुछ पुरानी तस्वीरों का इस्तेमाल कर झूठी खबर प्रकाशित की थी। खबर में लिखा था कि जेएनयू का छात्रसंघ जवानों की शहादत पर जश्न मनाते हैं ।

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