‘गरीबी और बेरोजगार में मर रही जनता को भागवत कब तक हिन्दू राष्ट्र का नशा पिलाते रहेंगे’

‘गरीबी और बेरोजगार में मर रही जनता को भागवत कब तक हिन्दू राष्ट्र का नशा पिलाते रहेंगे’
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आरएसएस प्रमुख के हालिया बयान ने साफ़ कर दिया है कि हिन्दू राष्ट्र के लिए हिंसा और चरमपंथी जायज़ है। यह सवाल भी अहम है कि भारत का सारा खजाना खाली हो जाए तो हिन्दू राष्ट्र की बुनियाद क्या होगी? एक खोखली जमीन पर गरीबी और बेरोजगार में मर रहे जनता को भागवत कब तक हिन्दू राष्ट्र का नशा पिलाते रहेंगे। यूपी, राजस्थान, बिहार, भोपाल, भाजपा की सरकार वाली सभी राज्यों में मुसलमानों का शोषण और हत्या हो रहा है।

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दलित और ईसाईयों पर हिन्दू की तलवार लगातार लटकी हुई है, लेकिन सबसे ज़्यादा कोई टारगेट किया जा रहा है तो वह मुसलमान हैं। मीरठ में दिए गए भागवत के बयान का गौर से जायजा लीजिए तो इस बयान से खून की बू आती है। भाजपा को मिलने वाली लगातार नाकामी, और पूंजीपतियों की बैंक लूट से जनता में होने वाली विद्रोह को कुचलने का एक ही बड़ा रास्ता आरएसएस के पास रह जाता है और वह है सम्प्रदायिकता एकतरफा दंगा उन दंगों से जब भी माहौल गरमाया है, फायदा भाजपा हुआ है।

मेरी सबसे बड़ी फ़िक्र यह है कि मुसलमानों का क्या होगा? नोटबंदी हो या जीएसटी, जिसकी कमर सबसे ज़्यादा टूटेगी, वह मुसलमान होंगे। आर्थिक एतबार से जो सबसे ज़्यादा वध किया जायेगा, वह भी मुसलमान होंगे। इस देश में आरएसएस की सोच की पहली मंजिल मुसलमान हैं। और इसी लिए आरएसएस बार बार यह बयान देती आई है कि इस देश के सभी मुसलमान कनवर्टेड हैं। और यह बयान भी बरसों से देती आई है कि उसकी दुश्मनी मुसलमानों से नहीं, इस्लामी सोच रखने वालों से हैं क्योंकि एक दिन मुसलमानों की घर वापसी होकर रहेगी।

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