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जहाँ पर इंसान मारने वाले को छोड़ दिया जाता है वही हिरन मारने वाले को सजा हो जाती है: ज़फ़र सरेशवाला

20 साल पुराने काला हिरण शिकार मामले में जोधपुर कोर्ट ने सलमान खान को पांच साल की सजा सुनाने के बाद सलमान के क़रीबी ज़फ़र सरेशवाला इस पर प्रतिक्रिया दी.  ज़फ़र सरेशवाला ने अदालत के फ़ैसले पर टिप्पणी करने से इनकार किया लेकिन प्रशासन पर सवाल उठाए.

राजस्थान सरकार पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि ये वही राजस्थान है जहाँ पर गाय मारने वाले को छोड़ दिये जाते हैं लेकिन हिरन मारने वाले को सजा हो जाती है.
जजमेंट पर तो मेरी कोई प्रतिक्रिया नहीं करनी है. ये तो एक प्रक्रिया है. हमारे देश में कई कानूनी विकल्प मौजूद है.  मुझे उम्मीद है कि उच्च न्यायालय में वो तथ्य पेश होगे जो शायद यहां देखे नही गए या तवज्जों नहीं दिए गए.

मेरा सवाल आज की जजमेंट पर नहीं है.  सवाल ये है कि जब  काले हिरण  को मारने की सजा है इंसान को मारने की भी तो सजा है. इसांनों को सिर्फ इसीलिए मारा जा रहा है कि क्योंकि वो गाय को लेकर जाते हैं. मेरा सवाल अदालत से नहीं प्रशासन से है.


न्यूज 18 इंडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि दंगे में  इसांन मारे गए. हिन्दू मुस्लिम, दलित हर किस्म के इंसानो की जान जाती है क्या कभी प्रशासन से ऐसे लोगों को सजा दिलाने के लिए इस तरह की तेजी देखी गई.

कोर्ट के जजमेंट पर मुझे कोई  प्रतिक्रिया नहीं करनी है. ये तो एक प्रक्रिया है.  मुझे उम्मीद है कि उच्च न्यायालय में वो तथ्य पेश होगे जो शायद यहां देखे नही गए या तवज्जों नहीं दिए गए. देखें वीडियो.

क्या था मामला

19 साल पहले सितंबर 1998 में सलमान खान जोधपुर में सूरज बड़जात्या की फिल्म ‘हम साथ साथ हैं’ की शूटिंग कर रहे थे. इसी दौरान वो फिल्म में सहयोगी कलाकारों सैफ अली खान, सोनाली बेंद्रे, तब्बू और नीलम के साथ शिकार के लिए गए. आरोप है कि उन्होंने वहां संरक्षित काले हिरण का शिकार किया. शिकार की तारीख 27 सितंबर, 28 सितंबर, 01 अक्टूबर और 02 अक्टूबर बताई गई. साथी कलाकारों पर सलमान को शिकार के लिए उकसाने का आरोप लगा. अब उन्हें कांकणी हिरण शिकार में दोषी करार दिया गया है.

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