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सत्ता की भूख ने सीरिया की धरती पर पैदा हुए बेकसूरों को कब्र तक नसीब नहीं होने दे रही

सीरियाई राष्ट्रपति बशर-अल असद को सीरिया की सत्ता विरासत में मिली है। असद उस परिवार से आते हैं, जो दशकों तक इस देश पर राज कर चुका है। असद के पिता हाफिज अल असद ने 1971 से सन् 2000 तक इस मुल्क पर अधिकार किया। हाफिज अल असद के बाद इस राजनीतिक विरासत का जिम्मा उनके बड़े बेटे बासिल अल असद को मिलना था। लेकिन सन् 1994 में उनकी एक सड़क हादसे में मौत के कारण बशर अल असद के राजनीति में आने का सबब बना।

हफीज अल-असद के बड़े बेटे बासिल को उनका राजनीतिक उत्तराधिकारी माना जाता था. वह राष्ट्रपति की सुरक्षा के चीफ थे और सैन्य वर्दी में दिखाई पड़ते थे. साल 1994 में एक कार हादसे में बासिल की मौत हो गई और सारी सियासी जिम्मेदारियां बासिल के छोटे भाई बशर अल-असद के कंधों पर आ गई.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, राजनीति में बशर को कोई खास दिलचस्पी नहीं थी, लेकिन बासिल की मौत के बाद उनके पिता ने उन्हें लन्दन से वापस दमिश्क बुला लिया।

बशर अल-असद के सीरिया लौटने पर उन्हें पहले 1994 में ही टैंक बटालियन कमांडर बनाया गया। इसके बाद 1997 में वो लेफ्टिनेंट कर्नल बने और 1999 में उन्हें कर्नल बना दिया गया। साल 2000 में बशर के पिता हाफिज अल-असद की मौत हो गई, जिसके बाद पारिवारिक सत्ता को संभालने की जिम्मेदारी बशर ने उठाई और सन् 2000 में ही बशर अल-असद सीरिया के राष्ट्रपति बन गए। आज 18 साल बाद भी बशर सत्ता के शिखर पर काबिज हैं।

बता दें कि 2011 की अरब क्रांति भी उनकी कुर्सी नहीं हिला सकी है। ये उनकी ताकत का ही नतीजा है कि 74 फीसदी सुन्नी मुसलमान आबादी वाले सीरिया में 10 फीसदी से कम आबादी वाले शिया समुदाय के बशर अल-असद निरंतर राज कर रहे हैं।

चार दशकों से चली आ रही इस सत्ता को बचाने के लिए उन्होंने सीरिया को युद्ध का अखाड़ा बना दिया है। जहां दुनिया के दो ताकतवर गुट आपस में जोर-आजमाइश कर रहे हैं और सीरिया की धरती पर पैदा हुए बेकसूरों को कब्र तक नसीब नहीं हो रही है।

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