Tuesday , September 25 2018

हुज़ूर (स.अ.व.) ने क़यामत की जो निशानियाँ बताईं, उसकी शुरुआत हो चुकी है

मूलक-ऐ शाम के हालात, इमाम महदी का ज़हूर और हज़रत मुहम्मद ﷺ की पेशनगोइंया। अल्लाह के रसूल ﷺ ने कयामत के निशानात बतलाते हुए फरमाया, कि ऊंटों और बकरियों के चरवाहे जो नँगे बदन और नंगे पैर होंगे, वो एक दूसरे के साथ मुकाबला करते हुए लंबी लंबी इमारते बनाएंगे और फख्र करेंगे।

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(शाही मुस्लिम 8) आज, रियाद शहर में इमारतों का मुकाबला अपनी ऊंचाई पर पहुंच गया। दुबई में ‘बुर्ज खलीफा’ की इमारत दुनिया की सबसे ऊंची इमारत बन गई है, साथ ही शहज़ादा वलीद बिन तलाल ने जद्दा में उससे भी बड़ी इमारत बनाने का ऐलान कर दिया है।

जो धड़ा धड़ बनती चली जा रहीं है, अरब इमारतें सारे जंहा से ऊँची हो चकी हैं, अर्ज़ करने का मकसद ये है कि हमारे प्यारे रसूल मुहम्मद ﷺ ने फरमाया वो पूरा हो चूका है। और पेशनगोइंया पूरी हो कर अपने नुक्ते कमाल को पहुँच चुकी हैं!

सवाल यह पैदा होता है कि इस ज़वाल के वाद क्या है? अल्लाह के रसूल ﷺ की एक और हदीस है कि कयामत से पहले सरज़मीने अरब सर सब्ज़ हो जायेगी। (सही मुस्लिम) सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात ने बारिश शुरू हो चुकी है, मक्का और जेद्दा में सेलाब आ चुके हैं।

अरब सर ज़मी, जिसे पहले ही जदीद टेक्नोलॉजी को काम में लाकर सर सब्ज़ बनाने की कोशिश की गई है, वो कुदरती मौसम की वजह से भी सर सब्ज़ बनने जा रही है सउदी अरब गंदुम में पहले ही खुद कफील हो चूका है। अब सूखे पहाड़ों पर बारिश की वजह से सब्जी उगना शुरू हो चूका है।

पहाड़ सर सब्ज होना शुरू हो गया है, बारिश की वजहा से सरकार को एक बांध को बनाने होंगे जिस से पानी की नहरे निकलेंगी, हरियाली होगी सब्जा मज़ीद होगा फसलें लहराएंगी। यु ये पेशनगोई भी अपने तकमिले मराहिल से गुजरने जा रही है। और जो हमारे मुहम्मद ﷺ ने फरमाया उसे हम अपनी आँखों से देखते जा रहें हैं।

अगर हदीस पर गौर करें तो मशरिके बुस्ता के ज़वाल का आगाज़ मूलके शाम से शुरू हुआ लेकिन शायद अरब हुक्मरान या तो यहूद बा नसारा की चाल समझ ना सके। ये बे रूखी इख्तियार की लेकिन वजह जो भी हो या न हो। सरकार सल्लाहु अलैही वसल्लम की बताई हुई अलामत को तो ज़ाहिर होना ही था हदीस के मुताबिक। हदीस पाक में इरशाद है रसूलुल्लाह ﷺ ने फरमाया, जब एहले शाम तबाही व बर्वादी का शिकार हो जाये तो फिर तुम में कोई खेर बाकी ना रहे गी।

इस हदीस के हिसाब से अरब मुमालिक के सुन्हेरे दौर के खात्मे की अहम वजह मूलके शाम की मोजूदा हालात हैं, गोया नबी सल्लाहु अलैहि वसल्लम की एक और पेशनगोई की अलामत ज़ाहिर हो रही है या हो चुकी है। याद रखें! कि मूलके शाम के मुतल्लिक़ इजराइल, रूस व अमरीका जो भी झूठे बहाने बनाए लेकिन इन सब का असल हिदाफ जज़ीरा अल अरब है, क्योंकि कुफ्फार का अक़ीदा है के दज़्ज़ाल मसीहा है, उस वजह से ये लोग दज़्ज़ाल के इंतज़ामात मुकम्मल कर रहे हैं। जिसके लिऐ अरब मुमालिक में अदमें इस्तेहकाम पैदा करना है।

1) हजरत अनस रजि अल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया — बेशक कयामत की निशानीयो मे से ये भी निशानी है, इल्म का उठ जाना, जहालत का फैल जाना। सही बुखारी 80

2) एक और रिवायत मे है कि कयामत के दीन के करीब मे इल्म उठा लिया जाएगा, जहालत उतारी जाएगी, और हर्ज बहुत ज्यादा हो जाएगा, और हर्ज से मुराद कत्ल है। तिर्मिजी 2200

क्या ये हकीकत नही के यहुद व नसारा तौरात, और इंजिल पढते है लेकिन उसमे मे जो कुछ भी लिखा है उसमे से किसी चीज पर भी अमल नही करते (यानी इल्म उठ जाने का मतलब ये है कि दीनी इल्म पर अमल नही किया जाएगा)
तबरानी कबीर 5291

 

(साभार- इस्लामिक वर्ल्ड)

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