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हैदराबाद पुलिस रोहिग्या मुद्दे की बैठकों पर रख रही है खास नजर

हैदराबाद पुलिस पिछले कुछ दिनों से हैदराबाद में मुसलमानों के निर्वासन का विरोध करने वाली बैठकों पर नजर रख रही है। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा था कि म्यांमार के अवैध आप्रवासियों ने देश के सुरक्षा लिए खतरा पैदा किया हो सकता है इसलिए उन्हें जल्द ही वापस भेज दिया जाएगा।

अखिल भारतीय मजलिस इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम), अखिल भारतीय मजलिस बचाव तेहरी (एआईएमबीटी), कल्याण पार्टी, कांग्रेस, टीडीपी और वाम दलों ने हाल ही में भाजपा की अगुवाई वाली एनडीए सरकार से रोहिंग्याओं को यहां से नहीं स्थानांतरित करने की मांग की है। मानवीय आधार जमैत-ए-इस्लाम हिंद जैसे मुस्लिम संगठन भी मांग का समर्थन कर रहे हैं।

जहाँ कांग्रेस, टीडीपी और वामपंथी पार्टियों के नेता, सीपीएम और सीपीआई ने पिछले एक हफ्ते में ओल्ड सिटी में बैठकों की एक श्रृंखला को संबोधित करते हुए रोहिंग्याओं को अपने बस्तियां में से स्थानांतरित करने के किसी भी कदम का विरोध किया। वही एआईएमआईएम प्रमुख अस्दुद्दीन ओवैसी इस मुद्दे पर आगे रहे हैं और उन्होंने इस मुद्दे पर कई बैठकें भी कीं।

NIA के साथ हैदराबाद पुलिस इस बात पर विचार कर रही है कि क्या ऐसे दृश्य संगठनों के पीछे कोई और भी शामिल है ? जो रोहिंग्या मुस्लिम के लिए समर्थन जुटा रहे है। विशेष शाखा पुलिस के एक अधिकारी ने द संडे गार्जियन को बताया, “हम रोहिग्या के लिए काम कर रहे कुछ गैर-सरकारी संगठनों की भूमिका से अवगत भी होने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन हम देख रहे हैं कि आतंक नेटवर्क से तो कहीं कोई जुड़ाव नहीं है?”

कुछ गैर-सरकारी संगठन हैं जैसे कॉन्फडरेशन ऑफ वाल्टन्टरी एसोसिएशन्स (सीओवीए) जो पिछले पांच सालों से पुराने शहर में रोहिंग्या के पुनर्वास के लिए काम कर रहे हैं। मजार हुसैन के नेतृत्व में कोवा ने लगभग 3,000 रोहिग्या परिवारों को पहचान पत्र जारी करने और अपने बच्चों को स्कूली शिक्षा प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। यह और कुछ अन्य गैर सरकारी संगठन हमेशा पुलिस के साथ सहयोग भी करते है।

इस मामले में एक अन्य भाजपा विधायक एन.व्ही.एस.एस. प्रभाकर ने समाचार पत्र को बताया, “शरणार्थियों को राहत प्रदान करना एक अलग चीज है और उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा की कीमत पर देश में रखना और बात है।”

पुलिस का मानना ​​है कि लगभग 5,000 रोहंग्या से संबंधित मुद्दा मुख्य भले हो या नहीं लेकिन उनके निर्वासन का प्रभाव 30 लाख से अधिक स्थानीय मुसलमानों के लिए एक बड़ा मुद्दा बन गया है। पुलिस को चिंता है कि इस मुद्दे को कट्टर तत्वों द्वारा स्थानीय मुस्लिम युवकों को कट्टरपंथी बनाने के लिए इस्तेमाल ना किया जा सकते।

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