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ICMR डॉक्टरों का रिसर्च : एक इंच की मोबाइल स्क्रीन पर चिपके रहते हैं 20,107 किटाणु

नयी दिल्ली : मोबाइल फोन का क्रेज ज्यादा ही बढ़ गया है कि लोग जरूरत से ज्यादा मोबाइल का इस्तेमाल कर रहे हैं। खाते वक्त हो या टॉयलेट जाते वक्त हाथ में मोबाइल हमेशा रहता है। अगली बार जब अपने हाथ धोएं तो मोबाइल को भी साफ करना ना भूलें। रिसर्चरों का कहना है कि एक औसत मोबाइल टॉयलेट सीट से भी ज्यादा गंदा होता है। भारत में ICMR की रिसर्च में भी इन बातों का खुलासा हुआ है इस रिसर्च में देश के 5 बड़े हॉस्पिटल के डॉक्टर शामिल थे। इस स्टडी में अस्पताल के सभी डॉक्टरों और स्टाफ को शामिल किया गया जिसमें 386 लोग इस रिसर्च में हिस्सा लिया। इनमें से 132 लोग अस्पताल के डॉक्टर और कर्मचारी थे। 54 लोग मेडिकल कॉलेज के स्टाफ थे।

100 मेडिकल स्टूडेंट्स और 100 दूसरे लोग थे। इनमें से 82 प्रतिशत के मोबाइल फोन पर किटाणु पाये गए। इन लोगों के मोबाइल में कोई आम किटाणु नहीं बल्कि बहुत ही खतरनाक बैक्ट्रिया पाये गए। ताजा स्टडी में पता चला है कि एक टॉयलेट की तुलना में मोबाइल फोन में उल्टी और पेट की समस्याएं पैदा करने वाले 10 गुना ज्यादा कीटाणु थे। मोबाइल स्क्रीन्स में ई-कोलाइ और फीकल जैसे घातक बैक्टीरिया पाए गए। ये बैक्ट्रिया ऐसी हैं जो एंटी बैक्ट्रियल दावा असर नहीं करती मतलब साफ है की इंसान मौत के मुह के करीब है। डॉ सौम्या विश्वनाथन आईसीएमआर केई निदेशक हैं उनके अनुसार ऐसे बैक्ट्रिया इन्सानों के लिए खतरनाक है अगर समय रहते इसपर गौर नहीं किया गया तो मौत ही इसका अंतिम परिणाम है।

अमेरिका की एरिजोना यूनिवर्सिटी के रिसर्चरों का कहना है कि लोग अपने फोन दूसरों को देते रहते हैं। इस तरह से फोन कभी साफ नहीं होते बल्कि उन पर बीमारियों का जमावड़ा बनता जाता है। यूनिवर्सिटी के माइक्रोबायोलॉजिस्ट चार्ल्स जर्बा का कहना है कि फोन लगातार हमारे मुंह और हाथों के नजदीक रहते हैं, इसीलिए वे बीमारियों के घर बन जाते हैं। चूंकि मोबाइल इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस हैं इसलिए लोग उन्हें साफ करने में हिचकते हैं। लेकिन हमें समय-समय पर उन्हें किसी एंटीबैक्टीरियल चीज से साफ करते रहना चाहिए। इसी तरह की पहले हुई एक और रिसर्च में दावा किया गया है कि कैश रजिस्टर, कंप्यूटर कीबोर्ड और रिमोट कंट्रोल जैसी साफ लगने वाली चीजों में भी ढेरों नुकसानदायक बैक्टीरिया रहते हैं।

डेलॉयट के एक सर्वे के मुताबिक लोग जितना सोचते हैं, उनका मोबाइल फोन उससे कहीं अधिक गंदा होता है। रिपोर्ट के मुताबिक, मोबाइल को गंदा करने में सबसे बड़ा रोल आपके हाथों का होता है। सर्वे के मुताबिक, अमेरिका में एक दिन में लोग कम से कम 47 बार अपना मोबाइल चेक करते हैं, जिससे उनके हाथों से जर्म्स (कीटाणु) मोबाइल में चले जाते हैं।

रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि हाई स्कूल के स्टूडेंट्स के मोबाइल में 17,000 से ज्यादा बैटीरियल जीन्स पाए गए। एरिजोना यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स ने पाया है कि मोबाइल फोन में टॉयलेट सीट्स से कहीं ज्यादा जर्म्स होते हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ सदर्न कैलिफोर्निया के प्रोफेसर डॉक्टर विलियम डीपाउलो ने भी इस बारे में एक स्टडी की है।

उनकी टीम ने टॉयलेट सीट के मुकाबले मोबाइल फोन में बैक्टीरिया का पता लगाने के लिए एक कंपनी के एंप्लॉयीज की मोबाइल स्क्रीन्स से स्वाब कलेक्ट किए। रिसर्च में यह बात सामने आई कि जहां टॉयलेट सीट्स में बैक्टीरिया की 3 स्पीसीज (प्रजातियां) पाई गईं। वहीं, मोबाइल में बैक्टीरिया की एवरेज 10-12 स्पीसीज मिलीं। मोबाइल स्क्रीन्स में ई-कोलाइ और फीकल जैसे घातक बैक्टीरिया पाए गए।

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