बांग्लादेशी, रोहिंग्या मुसलमानों और चोरों की पहचान के लिए दिल्ली पुलिस कुछ इलाकों में कल से करेगी डोर-टु-डोर सर्वे

बांग्लादेशी, रोहिंग्या मुसलमानों और चोरों की पहचान के लिए दिल्ली पुलिस कुछ इलाकों में कल से करेगी डोर-टु-डोर सर्वे
Click for full image

नई दिल्ली : दिल्ली में अवैध रूप से रहने वाले बांग्लादेशी, रोहिंग्या मुसलमानों और चोर-उचक्कों की पहचान करने के लिए पुलिस कुछ इलाकों का डोर-टु-डोर सर्वे करेगी। यह काम साउथ-वेस्ट दिल्ली के आरके पुरम थाना इलाके से सोमवार से शुरू किया जाएगा। सर्वे के लिए चार झुग्गी-झोपड़ी क्लस्टर की पहचान की गई है, जहां पुलिस को चोरी, झपटमारी और सेंधमारी के मामलों में पकड़े गए आरोपियों के सबसे अधिक रहने की बात पता चली है।

डीसीपी देवेंद्र आर्य ने कहा, ‘हम सर्वे कर रहे हैं। यह बहुत ही जरूरी है। हमें उम्मीद है कि सर्वे पूरा होने के बाद इसके काफी सकारात्मक पहलू सामने आएंगे।’ एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से आरके पुरम थाना इलाके में घरों और ऑफिसों में चोरी और सेंधमारी की काफी वारदात हो रही हैं। साथ ही इलाके में बसों में चलने वाले यात्रियों के साथ भी लूटमार और जेबतराशी की काफी घटनाएं सामने आ रही हैं।

बढ़ती चोरियों और जेबतराशी की घटनाओं के देखते हुए शुक्रवार को डीसीपी थाने पहुंचे। उन्होंने तमाम बीट अफसर और एसएचओ की क्लास ली। उन्होंने कहा कि इस तरह की वारदात को हर हाल में रोका जाना चाहिए। उन्हें बताया गया कि अभी तक चोरी, सेंधमारी, झपटमारी और जेबतराशी की जितनी भी घटनाएं इलाके में हुई हैं, उसमें अधिकतर आरोपी आंबेडकर बस्ती, केडी बस्ती, एकता कैंप और संजय कैंप के रहने वाले निकले हैं। इसके बाद डीसीपी ने आदेश दिया कि इन तमाम झुग्गी-झोपड़ी वाले इलाकों का डोर-टु-डोर सर्वे किया जाए।

इसके लिए एक रजिस्टर मेंटेन किया जाएगा। हर घर में जाकर यह पता लगाया जाएगा कि उस घर में कितने लोग रहते हैं। उनकी कमाई का जरिया क्या है। उनके पास कितने वीकल हैं। वीकल किस-किस के नाम पर रजिस्टर्ड हैं। इसके अलावा, इन झुग्गियों में रहने वाले लोगों से यह भी पता लगाया जाएगा कि क्या वे भारतीय हैं। अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी और रोहिंग्या मुसलमानों का भी पता लगाया जाएगा।

उन्‍होंने कहा कि अवैध रूप से रहने वाले लोगों को उन्हें उनके देश वापस भेज दिया जाएगा। इसके लिए जो रजिस्टर मेंटेन किया जाएगा उसे एनआरसी रजिस्टर से जोड़े जाने की बात से पुलिस अधिकारियों ने इनकार किया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि उनका मकसद केवल इतना है कि जो लोग यहां रह रहे हैं उनकी नागरिकता की पहचान हो। साथ ही यह भी पता लग जाए कि वे क्या-क्या कर रहे हैं। इन इलाकों में काफी बीसी भी रहते हैं। उनकी तमाम गतिविधियों के बारे में भी रजिस्टर में अलग से लिखा जाएगा।

Top Stories