दरअसल मैं लोकतंत्र को भीड़तंत्र में बदलते देख उदास हूँ: इमरान प्रतापगढ़ी

दरअसल मैं लोकतंत्र को भीड़तंत्र में बदलते देख उदास हूँ: इमरान प्रतापगढ़ी
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मैं उदास हूँ, दुखी हूँ.

मेरी पलकें नम हैं……. मुझे अख़लाक़ की मौत पर भी उतना ही दुख है जितना जुनैद की मौत का, मुझे पहलू की मौत पर उतना ही दुख है जितना अय्यूब पंडित की मौत का, मुझे नईम की मौत का भी उतना ही दुख है जितना गणेश और गंगेश की मौत का।

मैं हरियाणा और राजस्थान में होती घटनाओं पर उतना ही दुखी हूँ जितना सहारनपुर के जलते हुए घरों पर था, मुझे बंगाल में एक बुज़ुर्ग की मौत पर उतना ही रोना आया जितना नजीब के ग़ायब होने पर आया था। दरअसल मैं लोकतंत्र को भीड़तंत्र में बदलते देख उदास हूँ। लेकिन मायूस नहीं हूँ ज़रा सा भी। हमने इन तमाम अराजकताओं के ख़िलाफ़ जब लोगों से अपील की ईद की नमाज़ काली पट्टी बॉंध कर पढ़िये तो सलाम है इस अवाम का कि इसने हमारी आवाज़ से आवाज़ मिलायी।

और पूरी दुनिया में लोगों ने अपने हाथों पर काली पट्टी बॉंध ली। नफ़रतों की खेती बहोत फल फूल रही है और मुहब्बतों का सिलसिला अभी अंकुरित हो रहा है लेकिन रोमांचित हूँ ये सोच कर कि काली पट्टी की मुहिम अब #NotinmyName में बदल कर हर अमनपसंद भारतीय तक पँहुच चुकी है। एक उम्मीद की किरन जागी है पूरे मुल्क़ में।

आइये अब इस सिलसिले को और आगे बढाते हैं, 6 August को हमारी कोशिश है कि हम तमाम नौजवान अलग अलग मज़हबों के मिलकर इस देश को एक बहोत जज़्बाती सा संदेश दें, हम एक एैसी कोशिश करें कि पूरे मुल्क़ में अराजक भीड़ को अराजकता फैलाते हुए शर्म महसूस होने लगे।

इस वक्त टीपू सुल्तान की सरज़मीं पर बैठा हुआ ये संदेश आप सबके नाम लिख रहा हूँ………. हम कुछ दीवाने इस गंगा जमुनी तहज़ीब से मुहब्बत करने वाले मिलजुल कर एक और नयी शुरुआत करने चल रहे हैं। 15 July की शाम हम बाक़ायदा अपनी इस गॉंधीवादी मुहिम की घोषणा करेंगे। तो इंतज़ार करिये 15 July की शाम का और दुआ कीजिये 6 August के लिये कि हम अमनपसंद लोग कामयाब हो सकें।

तब तक जुड़े रहें हमसे, हमारी कोशिशों से।

इमरान प्रतापगढ़ी
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