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मोदी सरकार में हथियार उठाने वाले युवाओं की तादाद में इज़ाफ़ा : महबूबा मुफ़्ती

नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने विधानसभा में कहा कि साल 2015 में 66, 2016 में 88 और 2017 में 126 युवा आतंकी संगठन में शामिल हुए। वहीं, जम्मू-कश्मीर में 2017 में रिकॉर्ड 126 युवाओं ने आतंक का दामन थामा है। पिछले साल पाकिस्तानी आतंकियों ने 515 बार घुसपैठ की कोशिश की। इस दौरान मुस्तैद सुरक्षा बलों ने उसके मंसूबों पर पानी फेरते हुए 75 आतंकियों को ढेर कर दिया। मुख्यमंत्री ने नेशनल कांफ्रेंस के नेता अली मोहम्मद सगर के एक लिखित प्रश्न के उत्तर में यह बात कही।

पिछले साल मार्च में संसद में दी गयी जानकारी के मुताबिक, साल 2011, 2012, 2013 के मुकाबले 2014 में घाटी में हथियार उठाने वाले युवाओं की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। साल 2010 में 54, 2011 में 23, 2012 में 21 और 2013 में 16 युवाओं ने आतंक के तरफ मुंह मोड़ा। वहीं 2014 में अचानक यह बढ़ोतरी हुई और 53 युवाओं ने आतंक का रास्ता चुना।

8 जुलाई 216 को दक्षिण कश्मीर में हिज्बुल मुजाहिद्दीन के कमांडर बुरहान वानी के मारे जाने के बाद और अधिक युवा आतंकी संगठन में शामिल हुए। 2016 में 88 और 2017 में 126 युवा आतंकी संगठन में शामिल हुए। आपको बता दें कि जम्मू-कश्मीर में लश्कर-ए-तैयबा, हिजबुल मुजाहिद्दीन समेत कई आतंकी संगठन सक्रिय हैं। ये संगठन खास तौर पर दक्षिण कश्मीर में सक्रिय हैं।

एक अधिकारी ने बताया कि यह चिंता की बात है कि घाटी में युवा इस बात को जानते हुए भी आतंकवादी समूहों से जुड़ रहे हैं कि इससे उनके मारे जाने का खतरा है। केंद्र सरकार ने मंगलवार को बताया कि 2017 में 515 बार सीमा पार से जम्मू-कश्मीर में आतंकियों ने घुसपैठ की कोशिश की। इस दौरान सुरक्षाबलों ने 75 आतंकियों को मार गिराया।

सुरक्षा बलों को लगता है कि मौजूदा समय के आतंकवादियों और 1990 के शुरूआती दशक के आतंकवादियों में अंतर है। उनका कहना है कि उस समय के आंतकवादी समूहों की तुलना में इस समय के आतंकवादी वैचारिक रूप से अधिक कट्टर हैं। अधिकारियों ने बताया कि यह चिंता की बात है कि घाटी में युवा इस बात को जानते हुए भी आतंकवादी समूहों से जुड़ रहे हैं कि इससे उनके मारे जाने का खतरा है।

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