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रेप का आरोपी बरी, अदालत ने कहा- लड़की मुस्लिम है शरीयत के मुताबिक 14 साल में हो जाती है बालिग

Judges gavel and law books stacked behind

दिल्ली की एक अदालत ने पॉक्सो एक्ट के तहत गिरफ्तार बलात्कार के एक आरोपी को बरी कर दिया। कोर्ट ने कहा कि पीड़िता मुस्लिम है और शरीयत के मुताबिक 14 की उम्र में लड़कियां यौवन हासिल कर लेती हैं।

इस मामले में 29 नवंबर, 2013 को नाबालिग के पिता ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में उन्होंने लिखा कि उनकी 17 साल 5 महीने की बेटी लापता हो गई है। उन्होंने शिकायत में लिखा कि पड़ोस में रहने वाले एक आदमी ने उसका अपहरण कर लिया था।

बाद में जब लड़की मिली तो उसने पुलिस से कहा कि वह आरोपी के साथ खुद ही जम्मू चली गई थी। वहां उन दोनों ने शादी कर ली थी। वापस आने के बाद लड़की ने मेडिकल टेस्ट कराने से भी इनकार कर दिया था।

जन्म प्रमाण पत्र से पता चला कि लड़की अपनी शादी के समय नाबालिग थी। इसके बाद भारतीय दंड संहिता की धारा 366 तहत आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया।

इसके बाद लड़की ने 21 अप्रैल, 2014 को शिकायत दर्ज कराई कि आरोपी ने उसका यौन उत्पीड़न किया है। उसने कहा कि आरोपी ने न केवल उसका उत्पीड़न किया बल्कि उसे अगवा कर जम्मू ले गया और वहां उसका दुष्कर्म किया। पीड़िता ने अपनी शादी से भी इनकार करते हुए कहा कि पुलिस को गुमराह करने के लिए आरोपी ने वो तस्वीरें खिंचवाई थीं।

लड़की ने अपने बयान में कहा कि वो तीन दिन तक रोती-बिलखती रही। उसने आरोपी और उसकी चाची कहा कि उसे घर छोड़ दें लेकिन उन लोगों ने उसे जान से मारने की धमकी दी। लड़की ने बताया कि आरोपी उसके लिए अपनी बहन के कपड़े भी लेकर आया था जिसे उसने पहनने से मना कर दिया था। मना करने पर आरोपी और उसकी चाची ने उसे बहुत मारा था।

हालांकि आरोपी ने लड़की के बयान को नकारते हुए कहा कि उसे इस केस में फंसाया गया है। आरोपी ने कहा कि लड़की ने अपने परिवार के दबाव में आकर उसे फंसाया है।

केस की सुनवाई कर रहे जज ने इस बात पर गौर किया कि लड़की ने अपने बयान में दिल्ली से जम्मू जाने और वापस आने के बारे में कोई जिक्र नहीं किया है। इससे पता चलता है कि लड़की आरोपी के साथ बिना किसी जबरदस्ती के गई थी।

उन्होंने नोट किया कि लड़की को किसी भी तरह का नशीला पदार्थ नहीं दिया गया और न ही यौन उत्पीड़न या मारपीट के कोई सबूत मिले और 6 दिसंबर 2013 को वह खुद वापस आई जिससे पता चलता है कि उसका यौन उत्पीड़न नहीं किया गया था। उसने खुद अपनी मर्जी से 29 नवंबर, 2013 को आरोपी के साथ शादी की थी।

रोहिनी कोर्ट के एडिशनल सेशन जज अमित कुमार ने कहा ”सुप्रीम कोर्ट के नियमों के अनुसार 18 साल से कम उम्र के लड़की के साथ संबंध बनाना कानूनन अपराध है, चूंकि लड़की एक मुस्लिम है और मुस्लिम नियमों के अनुसार लड़कियां 14 साल की उम्र में बालिग हो जाती हैं और उसने बालिग होने के बाद शादी की है।

फैसला सुनाते हुए उन्होंने कहा कि अपनी शादी को अमान्य दिखाने के लिए लड़की ने कोई पुख्ता सबूत पेश नहीं किए। वह ये साबित नहीं कर सकी कि उसकी शादी जबरदस्ती या गलत तरीके से हुई और उसका यौन शोषण किया गया है। जज ने लड़की को अविश्वसनीय बताते हुए आरोपी को बरी कर दिया।

साभार- ‘न्यूज 18’

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