Wednesday , June 20 2018

15 जून को भारत सहित पुरी दुनिया में एक साथ हो जायेगी ईद?, ऐसा पहली बार होगा!

रमजान का पाक महिने के अब कुछ ही दिन बचे है दुनियाभर के मुस्लिम इस बरकती महीने में रोज़े रख रहे है और इस्बदत में मशगूल है। एक वरिष्ठ सऊदी मौसम विज्ञानी ने कहा है कि रमजान इस साल 29 दिनों तक रहने की उम्मीद है, जिसका मतलब है कि सऊदी अरब में ईद अल-फ़ितर15 जून को मनाई जा सकती है।

खबरों के मुताबिक, अब्दुलअज़ीज़ अल हुसेनी ने कहा कि यह खगोलीय गणना ईद के चाँद के दिन वायुमंडलीय स्पष्टता की स्थिति पर है यानी ईद का चाँद 14 जून को देखा जा सकता है।

सूत्रों के मुताबिक भारत में भी ऐसा हो सकता है, यानी ईद की नमाज़ सऊदी अरब सहित पुरी दुनिया में एक साथ मनाई जा सकती है। ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि इस बार सऊदी अरब के साथ भारत में भी एक साथ रमज़ान की शुरुआत हुई है।

लेकिन आपको बताता चलूं की भारत में कुछ लोगों ने 18 तारीख से रोज़ा रखना शुरू किया है। दो दिन रमज़ान की शुरुआत से मुस्लिम विद्वानों ने इसे ठीक करने की सलाह दी थी। उनका कहना है कि रमज़ान और ईद एक साथ शुरू होनी चाहिए।

सलाह के बाद आपस में बैठकर सुलह की खबर आ रही है। सूत्रों के मुताबिक इस मिटिंग में सभी मसलक के लोग शामिल हुए और एक सहमती बनाने की कोशिश की।

इस्लामी कैलेंडर सीधे चाँद चक्र का पालन करता है, जिसका मतलब है कि प्रत्येक महीने 29-30 दिनों का होता है।

इन बदलावों के कारण, इस्लामी कैलेंडर में विशिष्टता और सटीक तारीखें नहीं हैं। यह इस बात पर निर्भर करता है कि जब नया चाँद दिखाई देता है और दो विश्वसनीय गवाहों द्वारा देखा जाता है।

हालांकि, यह कुछ महीनों के लिए नए चाँद को देखकर कुछ महीनों के कारण नए महीने के लिए अलग-अलग आरंभ तारीखों का कारण बन सकता है।

यही वजह है कि विभिन्न देशों में ईद अक्सर अलग-अलग दिनों में मनाई जाती है, जिसमें एक दिन का अंतर होता है। केवल धार्मिक विद्वानों, निकायों और सरकारों को ईद और अन्य धार्मिक छुट्टियों की सही तारीख घोषित करने का अधिकार है।

रमजान की शुरुआत परंपरागत रूप से “हिलाल” दृश्यों पर आधारित है, जो कुरान-ए-पाक में है और हमारे नबी ने बताया है। ऐसे में अगर कोई शख्स आसमान की तरफ देखता और से बारीक चाँद नज़र आता है तो हिलाल कहते है।

जो महीने की शुरुआत में दिखाई देता है. अगर कोई रात में हिलाल देखता है, तो अगले दिन रमजान का पहला रोज़ा होता है। विद्वानों का कहना है कि, चाँद देखकर ही रोज़ा रखना चाहए और चाँद देखर ही ईद मनानी चाहे।

TOPPOPULARRECENT