Wednesday , September 26 2018

भारत पहली बार ईरान में रुपये में निवेश करने को तैयार

ईरानी राष्ट्रपति हसन रूहानी का यह दौरा दोनों देशों के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रूहानी के इस दौरे पर रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण चाबहार बंदरगाह की चाबी भारत को सौंप सकते हैं। शनिवार को वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे। पश्चिमी देशों द्वारा ईरान पर लगे प्रतिबंधों के कारण पैदा हुए बैकिंग संकटों के मद्देनजर भारत पहली बार ईरान में भारतीय रुपये में निवेश करने को तैयार हो गया है।

यह काफी खास इंतजाम है जो अब से पहले सिर्फ नेपाल और भूटान के लिए ही किया गया था। तेहरान पर लगे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के चलते, ईरान में अंतरराष्ट्रीय मुद्राओं में लेनदेन करना और निवेश करना अब भी कठिन है। सूत्र ने कहा, ‘भारत ने रुपये में निवेश करने की इजाजत दे दी है।’ सूत्रों के मुताबिक, ‘कनेक्टिविटी, ऊर्जा व्यापार और संस्कृति, ईरानी राष्ट्रपित के दौरे का आधार हैं।’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूहानी के बीच इससे पहले दो बार- पहली बार उफा मेंऔर फिर तेहरान में भी मुलाकात हो चुकी है। हालांकि ऊर्जा को लेकर दोनों देशों के रिश्तों में अभी भी असमंजस कायम है। ईरान भारत को कच्चा निर्यात करने वाले चोटी के देशों में शामिल है लेकिन फरजाद बी फील्ड को लेकर बात ज्यादा आगे नहीं बढ़ पायी है। यहां पर ओएनजीसी विदेश लिमिटेड (ओवीएल) ने करीब एक दशक पहले गैस रिजर्व की खोज की थी लेकिन इस फील्ड के विकास को लेकर ईरान से बातचीत अभी तक अटकी हुई है।

भारतीय सूत्रों का कहना है कि वे ईरान के साथ इस मुद्दे पर बातचीत करने को तैयार हैं लेकिन उनका मानना है कि ईरान इस पर कोई व्यावहारिक डील चाहता ही नहीं है। रूहानी का यह दौरा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खाड़ी और मध्य एशियाई देशों के दौरे के कुछ दिन बाद और ईरान के घोषित शत्रु इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के भारत दौरे के कुछ सप्ताह बाद हो रहा है।

TOPPOPULARRECENT