Tuesday , August 14 2018

जज लोया की मौत संदिग्ध नहीं थी, सुप्रीम कोर्ट ने जांच की मांग ख़ारिज की

लोया की मौत की एसआईटी से जांच

नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई के स्पेशल जज ब्रजगोपाल हरकिशन लोया की मौत की एसआईटी से जांच करवाने की मांग को ख़ारिज कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने एसआईटी की जांच वाली मांग की याचिका को ठुकरा दिया. साथ ही याचिकाकर्ता को फटकार लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एसआईटी जांच की मांग वाली याचिका में कोई दम नहीं है। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस ए एम खानविलकर और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड की बेंच ने फैसला सुनाया है. कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ताओं ने यह दिखाने की कोशिश की कि वे इस मामले की जांच चाहते हैं लेकिन यह न्यायपालिका के ख़िलाफ़ है.” सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जजों के बयान पर हम संदेह नहीं कर सकते. कोर्च ने कहा कि राजनीतिक लड़ाई मैदान में की जानी चाहिए, कोर्ट में नहीं. कोर्ट ने माना है कि जज लोया की मौत प्राकृतिक है. कोर्ट ने कहा कि जनहित याचिका का दुरुपयोग नहीं होना चाहिए. सोहराबुद्दीन शेख के कथित फर्जी मुठभेड़ मामले की सुनवाई कर रहे जज बीएच लोया की मौत 1 दिसंबर 2014 को नागपुर में हुई थी. वे वहां एक शादी में शामिल होने गए थे. उस वक़्त उनकी मौत की वजह दिल का दौरा पड़ना बताई गई थी.

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा था की ये मामला गंभीर है और एक जज की मौत हुई है. मामले को गंभीरता से देख रहे हैं और तथ्यों को समझ रहे हैं. अगर इस दौरान अगर कोई संदिग्ध तथ्य आया तो कोर्ट इस मामले की जांच के आदेश देगा. सुप्रीम कोर्ट के लिए ये बाध्यकारी है. हम इस मामले में लोकस पर नहीं जा रहे हैं. चीफ जस्टिस ने दोहराया कि पहले ही कह चुके हैं कि मामले को गंभीरता से ले रहे हैं.

नवंबर 2017 में अँग्रेजी पत्रिका ‘द कैरेवन’ ने एक ख़बर छापी जिसमें पहली बार जज लोया की मौत की परिस्थितियों पर सवाल उठाया गया.
27 नवंबर को महाराष्ट्र के लातूर शहर के बार एसोसिएशन ने लोया की मौत की जांच को लेकर एक न्यायिक आयोग के गठन की मांग की ताकि सब कुछ साफ़ हो सके. 4 जनवरी 2018 को बॉम्बे लॉयर्स एसोसिएशन ने जज लोया की मौत की परिस्थितियों की जाँच के लिए मुंबई हाई कोर्ट में अर्ज़ी दाख़िल की. इस बीच सामाजिक कार्यकर्ता तहसीन पूनावाला ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका डाल दी. अन्य याचिकाकर्ताओं में महाराष्ट्र के पत्रकार बीएस लोने, बांबे लॉयर्स एसोसिएशन सहित अन्य द्वारा विशेष जज बीएच लोया की मौत की निष्पक्ष जांच की मांग वाली याचिकाएं दाखिल की गईं थी.

याचिका देने के बाद सुप्रीम कोर्ट के चीफ़ जस्टिस दीपक मिश्रा ने मुंबई हाई कोर्ट में लंबित लॉयर्स एसोसिएशन की याचिका को भी ट्रांसफ़र करवा लिया और सारी याचिकाएं मिलाकर एक मामला बना दिया. सुनवाई ख़त्म होने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने 16 मार्च को फ़ैसला सुरक्षित रख लिया था. जज लोया, सोहराबुद्दीन शेख के कथित फर्जी मुठभेड़ मामले की सुनवाई कर रहे थे जिसमें भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अध्यक्ष अमित शाह भी आरोपी थे. बाद में शाह को इस मामले में बरी कर दिया था.

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