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रोहिंग्या की वापसी पर बोली सुषमा स्वराज : भारत उनकी सुरक्षित और स्थायी वापसी के पक्ष में

Naypyitaw: Myanmar's President Win Myint, right, shakes with visiting Indian External Affairs Minister Sushma Swaraj during their meeting at the President House in Naypyitaw, Myanmar, Thursday, May 10, 2018. AP/PTI(AP5_10_2018_000161A)

भारत ने कहा है कि वह सैन्य कार्रवाई के बाद बांग्लादेश भागे विस्थापित रोहिंग्या मुसलमानों की सुरक्षित तीव्र और स्थाई वापसी के लिए म्यांमार की मदद के लिए तैयार है। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने स्टेट काउंसिलर आंग सान सू की समेत म्यामां के शीर्ष नेतृत्व से राखिने प्रांत से संबंधित मुद्दों पर चर्चा की।

सेना की कार्रवाई के दौरान बड़े पैमाने पर हिंसा के कारण पिछले साल 7,00,000 रोहिंग्या मुसलमानों को म्यांमार के राखिने प्रांत से पलायन करना पड़ा था। बड़ी संख्या में शरणार्थियों के पनाह लेने के कारण पड़ोसी बांग्लादेश में संकट उत्पन्न हो गया था।

विदेश मंत्रालय ने एक बयान में बताया कि दो दिन की यात्रा पर कल यहां पहुंची सुषमा ने दोहराया कि राखिने प्रांत से संबंधित मुद्दों को उठाने में म्यांमार की मदद करने के लिए भारत तैयार है।

बयान में कहा गया है कि उन्होंने राखिने सलाहकार आयोग की सिफारिशों को लागू करने के लिए म्यामां सरकार की प्रतिबद्धता का स्वागत किया और कहा कि द्विपक्षीय राखिने स्टेट विकास कार्यक्रम के तत्वावधान में भारत विभिन्न परियोजनाओं को लागू करने के लिए पहले से ही तैयार है।

बयान में उनके हवाले से कहा गया है कि विस्थापित लोगों की जरूरतों को पूरा करने के लिए राखिने प्रांत में पहली प्रमुख परियोजना प्रीफेब्रीकेटिड हाउसिंग की है।इसमें कहा गया है कि मंत्री ने राखिने प्रांत में विस्थापित लोगों की सुरक्षित, तीव्र और स्थाई वापसी की जरूरत पर बल दिया।

म्यांमार अधिकारियों ने कहा था कि विद्रोहियों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई का उद्देश्य उन रोहिंग्या आतंकवादियों का खात्मा करना है जिन्होंने 25 अगस्त को पुलिस चौकियों पर हमला किया था।

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