मुंबई की इस मस्जिद ने इस्लाम की गलतफहमियों को दूर करने का अनूठा तरीका अपनाया

मुंबई की इस मस्जिद ने इस्लाम की गलतफहमियों को दूर करने का अनूठा तरीका अपनाया
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मुंबई। मुंब्रा स्थित एक मस्जिद ने अनूठी पहल का आगाज किया है। यहां अल फुरकान मस्जिद ने एक कार्यक्रम शुरू किया है, जिसके तहत दूसरे धर्म के लोगों को इस्लाम के बारे में बताया जाता है। मुंबई मिरर की रिपोर्ट के अनुसार पिछले दो हफ्तों से हिंदू धर्म के 10 लोग हर रविवार को इस मस्जिद में आते हैं। वजू से शुरू होने वाला उनका दिन लजीज बिरयानी के साथ खत्म होता है।

इस बीच इस्लाम को लेकर उनके मन में जो सवाल होते हैं, उन्हें हल किया जाता है। इनमें से कोई इससे पहले मस्जिद नहीं गया था और कई को लगता था कि गैर-मुस्लिमों को मस्जिद में जाने की इजाजत नहीं है। विक्रोली के रहनेवाले सेल्समैन डी. गुप्ता बताते हैं कि कैसे बचपन में उन्हें लगता था कि मस्जिद के अंदर शिवलिंग होता है, जिसकी मुस्लिम पूजा करते हैं।

यही नहीं, जमात-ए-इस्लामी के एक सदस्य सैफ बताते हैं कि एक बार एक हिंदू ने उनसे कहा कि मस्जिदों के अंदर तलवारें रखी जाती हैं और एक कमरे में उन तलवारों से मारे जाने वालों के शव रखे जाते हैं। इस तरह की अफवाहों और भ्रम के बारे में सुनकर उन्हें झटका लगा और मस्जिद परिचय नाम का कार्यक्रम शुरू किया गया।

मस्जिद परिचय कार्यक्रम में संविधान और इस्लाम के बारे में बताया जाता है। मस्जिद में प्रवेश करते समय जमीन क्यों छूते हैं, नमाज कैसे पढ़ते हैं, पांच बार क्यों करते हैं और शुक्रवार का क्या महत्व है, इन सबके बारे में बताया गया। शिया-सुन्नी में फर्क, बुरका क्यों पहनते हैं, यहां तक कि मुस्लिमों को लगता है कि केवल उनका ही सच्चा धर्म है, इस तरह के सवाल भी उनसे पूछे गए।

मस्जिद परिचय के बारे में ज्यादा से ज्यादा लोगों को फेसबुक पोस्ट के जरिये पता लगा। उसके बाद से कुछ लोग मस्जिद आने लगे तो कई लोग फेसबुक पर ही अपने सवालों के जवाब मांगते हैं। जय भारत के संबोधन से शुरू होने वाले परिचय में जाने वाले आनंद मानते हैं कि जरूरत के समय में इस कार्यक्रम में हिस्सा लेने वाले भाइचारे के नाते एक-दूसरे को बचाएंगे। वह कहते हैं कि कुरान में भारतीय संविधान की तरह ही न्याय, एकता और बराबरी की बात कही गई है।

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