मुस्लिमों की राजनीति करने वाले बदरुद्दीन अजमल और ओवैसी को लेकर मौलाना महमूद मदनी ने दिया बड़ा बयान!

मुस्लिमों की राजनीति करने वाले बदरुद्दीन अजमल और ओवैसी को लेकर मौलाना महमूद मदनी ने दिया बड़ा बयान!

जमीयत उलमा-ए-हिंद के महासचिव मौलाना महमूद मदनी द्वारा आल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी के खिलाफ दिये गए बयान को लेकर बवाल मच गया है। इस मामले में अब जमीयत उलमा-ए-हिंद की सफाई आई है। इस मामले पर जमीयत उलमा – ए- हिंद के मीडिया इंचार्ज अजीमुल्लाह सिद्दीकी ने कहा कि मौलाना महमूद मदनी ने असदुद्दीन या उनकी पार्टी को बुरा नहीं कहा।

बल्कि पिछले काफी दिनों से ओवैसी जिस तरह आरएसएस के बयानों पर पलटवार कर रहे हैं, उसको लेकर मौलाना मदनी ने यह बातें कही हैं।
उन्होने कहा कि ओवैसी के बयानों से लग रहा है कि पूरे भारत का मुसलमान आरएसएस पर हमलावर हो रहा है।

खबरों की माने तो इससे पहले मौलाना महमूद मदनी ने कहा था कि ओवैसी और बदरुद्दीन अजमल अपने राज्य से बाहर मुस्लिमों की राजनीति करेंगे तो हम उन दोनों का खुलकर विरोध करेंगे।

जबकि सच्चाई यह है कि भारत का मुसलमान कभी भी हिंदू विरोधी नहीं रहा। सिद्दीकी ने बताया कि मौलाना मदनी का वीडियो करीब 15 दिन पुरानी है, जो मुंबई में हुए कार्यक्रम की है। बता दे कि सोशल मीडिया पर मौलाना महमूद मदनी की वीडियो वायरल हो रही है।

जिसमे वह कह रहे है कि वह ओवैसी को इंडियन मुस्लिम का नेता नहीं बनने देंगे। उन्हे केवल आंध्रा और तेलंगाना तक ही सीमित होना पड़ेगा। उन्होने कहा कि उन्हे कतई मंजूर नहीं की ओवैसी हैदराबाद से बाहर निकले। ये भी कहा कि ओवैसी को मुस्लिमों का नेता बनना है तो हैदराबाद के मुसलमानो का नेता बने।

मौलाना मदनी के बयान पर एएमयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष शहजाद आलम बरनी ने कहा कि देश में 5-6 मौलानाओं के परिवार 70 साल से कांग्रेस की दलाली कर मुसलमानों को सुरक्षा का डर दिखा रहे हैं।

उन्होने कहा, महमूद मदनी को राजनीति में नहीं पड़ना चाहिए, बल्कि उलेमा को उलेमा की तरह रहना चाहिए। उन्होने ये भी कहा, असदुद्दीन ओवैसी की मुखालफत करना किसी भी तरह से इस्लाम का हिस्सा नहीं है।

एक तरफ मुसलमानों की तरक्की की बात कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ एक मुसलमान को कामयाब नहीं होने देंगे, तो फिर यह कौन सा इस्लाम है। पूर्व अध्यक्ष ने कहा कि मौलाना को अपनी राजनीतिक दुकान बंद होते दिखाई दे रही है, इसलिए घबरा रहे हैं। इन मौलानाओं ने पिछले 70 साल से मुसलमानों को इस पर डराया कि अगर महफूज रहना है, तो कांग्रेस के साथ रहिए।

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