Monday , September 24 2018

नज़रिया : मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और मौलाना सलमान नदवी की बर्खास्तगी

मौलाना सलमान नदवी और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड आमने-सामने हैं लेकिन क्या इतना सब कुछ दो-तीन दिन की देन है? बाबरी मस्जिद शिफ्ट करने का फार्मूला बताते ही नदवी साब बागी हो गए और फिर आनन्-फानन में उनको बोर्ड से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। क्या झट से किसी सदस्य को बर्खास्त कर देना उचित है?

बाद की घटना में भी विरोधाभास है कि बोर्ड नदवी की बर्खास्तगी की बात कह रहा है और मौलाना नदवी का कहना है कि बोर्ड से अलग होने का फैसला उन्होंने खुद किया है। बोर्ड और मौलाना के बयानों की पृष्ठ्भूमि में कुछ तो छिपा है जो अभी सामने नहीं आया है लेकिन उसका आगाज जरूर हो गया है।

बर्खास्तगी के बाद मौलाना के दो बयानों पर गौर करें तो पता चलेगा कि अभी तक वो बात सामने नहीं आई है जिसके चलते यह हालात पैदा हुए हैं। एक बयान में मौलाना ने कहा, मैं उन लोगों के साथ नहीं हूं जो लड़ाई और दंगा चाहते हैं बल्कि मैं उन लोगों के साथ हूं जो भाईचारा चाहते हैं। इससे साफ़ है कि गुरु रविशंकर भाईचारा और बोर्ड के ओहदेदार लड़ाई-दंगा चाहते हैं।

नदवी साब के इससे पहले भी बयान आये कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड पर अब कट्टरपंथी हावी हो गए हैं। बोर्ड में उदारवादियों के लिए कोई गुंजाइश नहीं रह गयी है। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड अब ओवैसी की गोद में चला गया है। एक टीवी की डिबेट में सलमान नदवी ने यह भी कहा कि मुसलमानों को (बोर्ड को नहीं) शांति के लिए मस्जिद किसी और जगह बना लेनी चाहिए।

इस पूरे घटनाक्रम को देखें तो बोर्ड ने सलमान नदवी को बर्खास्त करके चुप्पी सी साध ली है और नदवी साब बयानों के साथ हावी दिखाई दे रहे हैं। बोर्ड में वह कौन लोग हैं जिन्होंने मौलाना सलमान की बोर्ड से बर्खास्तगी में भूमिका निभाई है। साफ़ है कि सैय्यद कासिम रसूल इलियास, कमाल फारूकी और असदुद्दीन ओवैसी की इसमें अहम भूमिका रही है।

सूत्रों के अनुसार बोर्ड की बैठक के पहले दिन जब इस मुद्दे पर चर्चा हुई तो बोर्ड के अध्यक्ष मौलाना राबे हसन नदवी और मौलाना अरशद मदनी ने सारे मामले पर चुप्पी साधे रखी थी। उनकी चुप्पी के भी कुछ मायने हैं।

कुल मिलाकर कहा जा सकता है जो चीजें अब तक सामने आईं हैं, वो आधी अधूरी हैं। हो सकता है जल्द ही किसी का कोई बड़ा बयान आकर तहलका मचा दे लेकिन इससे मुस्लिम समुदाय का क्या भला हुआ है या होगा यह भविष्य के गर्भ में है।

(नूरुद्दीन रहमान)

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