Friday , July 20 2018

बेटे की हत्या होते नहीं देखी इसलिए कोई संदिग्ध नहीं ,किसी भी निर्दोष को परेशानी में नहीं देख सकता- इमाम रशीदी

तीन दिन पहले आसनसोल दंगों में अपने 16 वर्षीय बेटे को खो चुके नूरानी मस्जिद के मौलाना इम्दादुल रशीदी ने कहा है कि उनके बेटे की हत्या का कोई संदिग्ध नहीं है। उन्होंने स्थानीय मुसलमानों से पुलिस के सामने किसी भी संदिग्ध का नाम नहीं लेने का निर्णय लिया है। इमाम ने आसनसोल दंगे में शांति के दूत के रूप में उभरते हुए सुर्खियां बटोरी हैं। बुधवार को उसके बेटे सिबतुल्ला रशीदी का शव बरामद किया गया।

उन्होंने कहा, ‘आसनसोल में दंगों में मैंने अपने बेटे की हत्या होते नहीं देखी, घर के बाहर होने के बाद वह गायब हो गया और मैंने पुलिस में उसके लापता होने की शिकायत दर्ज़ की थी’। मैंने किसी का नाम भी मेरे बेटे की हत्या में नहीं लेने का निर्णय लिया है क्योंकि मैं उस समय साक्षी नहीं था। मैं किसी भी निर्दोष व्यक्ति को परेशानी में नहीं दे सकता। अब पुलिस जांच कर पता करे कि कौन दोषी है।

रविवार को दोपहर की नमाज के बाद मस्जिद परिसर में हिंदुस्तान टाइम्स से बातचीत करते हुए रशीदी ने कहा कि उनके कुछ लोग मेरे विचारों पर गलतफहमी का शिकार हैं क्योंकि उनकी जांच में सहयोग के लिए अनिच्छा है। सिब्तुल्लाह का शव बरामद किए जाने के बाद उन्होंने कहा था कि अगर कोई बदले की बात करेगा तो वह मस्जिद और शहर छोड़कर चले जाएंगे। वह नहीं चाहते कि कोई और बाप अपना बेटा खोए।

उन्होंने पिछले शुक्रवार की नमाज के बाद भी आसनसोल में शांति बनाए रखने की अपील की। मैंने अपने बेटे को खो दिया है लेकिन वह बदला लेने के लिए नहीं कह सकते। इमाम ने कहा कि क्षमा कर देना इस्लाम की तालीम है। रविवार को आसनसोल में भाजपा सांसदों की टीम के उनके पास नहीं आने पर उन्हें कोई अफ़सोस नहीं है।

अगर वे यहां नहीं आना चाहते हैं तो यह उनकी इच्छा है। अगर कोई मुझसे मिलने आता है तो मैं उससे मिलूंगा लेकिन मैं ऐसी बैठकों के जरिये किसी को राजनीतिक लाभ लेने की इजाजत नहीं दूंगा। रशीदी ने कहा कि आसनसोल के डिप्टी मेयर को छोड़कर तृणमूल कांग्रेस से किसी ने भी इस दुखद घटना के लिए उन्हें याद किया।

इस बीच रशीदी से प्रेरित स्थानीय मुस्लिम ने शीतला डांगल क्षेत्र में रहने वाले हिंदू परिवारों की संपत्तियों की रक्षा करना शुरू कर दिया है जहां नूरानी मस्जिद स्थित है। एक स्थानीय निवासी मेहताब आलम और रशीदी के अनुयायी ने कहा कि यहां किसी भी घर, दुकान या शिव मंदिर पर हमला नहीं हुआ। एक स्थानीय जौहरी आर के वर्मा ने अपनी दुकान की सुरक्षा के लिए अपने मुस्लिम पड़ोसियों का धन्यवाद किया।

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