बस इंसाफ़ के लिए जिन्दा हू- तबरेज़ अंसारी की पत्नी

बस इंसाफ़ के लिए जिन्दा हू- तबरेज़ अंसारी की पत्नी

शाइस्ता परवीन को विधवा हुए अब तीन महीने बीत चुके हैं। एक महीने पहले ही तो उनकी और तबरेज अंसारी की शादी को दो माह का वक्त हुआ था। तबरेज 22 साल का था और शाइस्ता 19 वर्ष की। दोनों अपने मोबाइल फोन के जरिए एक-दूसरे से रोज (पुणे से झारखंड के कदमडीहा) बात करते थे।

बहते हुए आंसुओं के साथ शाइस्ता ने हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि तबरेज बहुत चर्चित था, वह किसी को भी हंसा सकता था।धतकीडीह के नजदीक तबरेज की भीड़ द्वारा पिटाई वाले दिन 17 जून को शाइस्ता बीमार हो गईं थीं और उनका गर्भपात हो गया था।

वह घंटों तक बैठकर यही सोचा करती थीं कि अब वह कैसे अपने जीवन को उबार पाएंगी। वह कहती हैं, ‘इंसाफ चाहिए, बस।’ शाइस्ता जानती हैं कि उन्हें अभी बहुत कठिन सफर तय करना है लेकिन उन्हें न्याय पर पूरा भरोसा है।

शाइस्ता ने कहा, ‘मुझे अपने पति के लिए न्याय चाहिए। एक बेगुनाह शख्स निर्ममतापूर्वक मार दिया गया।’ उन्होंने कहा, ‘जबतक दोषियों को सजा नहीं मिलती तब तक वह चुप नहीं बैठेंगी।

शाइस्ता का परिवार बेहरासई में रहता है जबकि तबरेज वहां से चार किलोमीटर की दूरी पर कदमडीहा में रहते थे। वह पुणे स्थित चिकली क्षेत्र में बतौर वेल्डर काम करते थे।

उनकी शाइस्ता से 27 अप्रैल को शादी हुई थी। कुछ दिनों बाद ही वह पुणे चले गए थे। तबरेज वहां से 45 दिनों बाद लौटे थे। ईद के बाद तबरेज शाइस्ता को अपने साथ ले जाने की तैयारी में थे। शाइस्ता बताती हैं, ‘वह शहर में हमारे रुकने के लिए एक कमरा तलाश रहे थे।’

गौरतलब है कि 22 वर्षीय तबरेज अंसारी की बाइक चोरी के शक में भीड़ ने इसी साल जून महीने में खंभे से बांधकर पीटा था। तबरेज की पिटाई के बाद अगले दिन 18 जून को पुलिस मौके पर पहुंचीं। पुलिस ने घायल तबरेज को गिरफ्तार कर लिया।

उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे चिकित्सकीय रूप से फिट घोषित कर दिया। एक मैजिस्ट्रेट ने उसे जेल भेजने के आदेश दे दिए। इस दौरान तबरेज की हालत बिगड़ती गई और उसकी 22 जून को मौत हो गई।

साभार- ‘नवभारत टाइम्स’

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