इशरत जहां फर्जी एनकाउंटर के आरोपी IPS पीपी पांडेय को CBI अदालत ने किया बरी

इशरत जहां फर्जी एनकाउंटर के आरोपी IPS पीपी पांडेय को CBI अदालत ने किया बरी
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अहमदाबाद। सीबीआई की एक विशेष अदालत ने इशरत जहां फर्जी मुठभेड़ प्रकरण में आरोपी गुजरात के पूर्व पुलिस महानिदेशक पी.पी. पांडेय की आरोपमुक्ति अर्जी आज स्वीकार कर ली। अदालत ने इस साल जनवरी में दायर पांडेय की अर्जी पर सुनवाई गत छह जनवरी को ही पूरी कर ली थी और अपना फैसला सुरक्षित रखा था।

मुंबई की एक कॉलेज छात्रा इशरत जहां तथा उनके पुरुष साथी और दो पाकिस्तानी नागरिकों को गुजरात पुलिस ने 15 जून 2004 को अहमदाबाद के बाहरी इलाके में कथित मुठभेड़ में मार गिराया था। उसका दावा था कि ये सभी आतंकी संगठन लश्करे तैयबा के आतंकी थे जो तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या की साजिश कर रहे थे।

बाद में सीबीआई ने इस मामले को फर्जी मुठभेड़ करार दिया तथा इसमें तत्कालीन संयुक्त पुलिस आयुक्त पांडेय समेत कई पुलिस अधिकारियों और गुप्तचर ब्यूरो के चार अधिकारियों को भी आरोपी बना दिया। पांडेय को इस मामले में जेल भी जाना पड़ा।

हालांकि जमानत मिलने के बाद उन्हें राज्य सरकार ने सेवा में बहाल कर प्रोन्नति दी और बाद में उन्हें प्रभारी महानिदेशक भी बना दिया। उन्हें सेवानिवृत्ति के बाद भी सेवा विस्तार देकर पद पर रखा गया था पर सुप्रीम कोर्ट में उनकी नियुक्ति को चुनौती देने वाली एक याचिका पर अदालत के कड़े रूख के बाद उन्होंने पद से इस्तीफा दे दिया था।

पांडेय ने अपनी आरोप मुक्ति अर्जी में कहा कि उनके खिलाफ यह मामला केवल परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर दर्ज किया गया है। उनके खिलाफ कथित षडयंत्र का आरोप साबित नहीं होता। उन्होंने सीबीआई पर राजनीतिक कारणों से गवाहों के बयान और साक्ष्यों को तोड़ मरोड़ कर किसी तरह उन्हें फंसाने का आरोप भी लगाया था।

दूसरी ओर, इशरत की मां शमीमा कौशर ने इस अर्जी का विरोध करते हुए आरोप लगाया कि पांडेय उनकी बेटी से, जब उसे हत्या से पहले गैरकानूनी ढंग से बंदी बना कर रखा गया था, कई बार मिले थे। वह इस मामले के एक प्रमुख षडयंत्रकर्त्ता हैं। सीबीआई ने भी उनकी अर्जी का विरोध किया था।

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