Sunday , January 21 2018

ISIS में जाने वालों को ऐसे रोक रही पुलिस

दहशतगर्द तंज़ीम आईएसआईएस की ओर तेजी से राग़िब हो रहे नौजवानों को रोकने के लिए तेलंगाना पुलिस अपना एक पुराना तरीका अपना रही है। कुछ दिनो पहले नौजवानो को नक्सलवाद की ओर बढ़ने से रोकने के लिए पुलिस ने सलाह-मशविरा का सहारा लिया था। आईए

दहशतगर्द तंज़ीम आईएसआईएस की ओर तेजी से राग़िब हो रहे नौजवानों को रोकने के लिए तेलंगाना पुलिस अपना एक पुराना तरीका अपना रही है। कुछ दिनो पहले नौजवानो को नक्सलवाद की ओर बढ़ने से रोकने के लिए पुलिस ने सलाह-मशविरा का सहारा लिया था। आईएस के मामले में भी वह यही कर रही है।

अंग्रेजी अखबार द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ऑफिशल्स का मानना है कि ज्यादातर लड़के और यूथ सोशल नेटवर्किंग साइट्स और इंटरनेट पर आईएस के प्रॉपेगैंडा से इसकी ओर राग़िब हो रहे हैं।

एक सीनियर खूफिया आफीसर ने कहा कि “हमें मालूम है कि आप इंटरनेट पर क्या कर रहे हैं। अगर आप बॉर्डर लाइन पार करते हैं तो हम आपके वालिदैन को इस बारे में बताएंगे और आपके लिए काउंसलिंग का इंतजाम करेंगे। हम हैदराबाद और तेलंगाना के कई नौजवानो की ऑनलाइन सरगर्मियों पर नजर रखे हुए हैं।”

पुलिस को आज से 10-15 साल पहले इसी तरह के हालात का सामना कर पड़ा था। उस वक्त नक्सल तहरीक अपने ज़ोर पर था और बड़ी तादाद में नौजवान इस ओर रागिब हो रहे थे।

नौजवान गांवों में नक्सलियों की मीटिंग अटेंड करने लगे थे, नक्सलियों से मिलने लगे थे। पहले तो पुलिस उन्हें पुलिस स्टेशन बुलाकर उन पर केस दर्ज करती थी लेकिन फिर पुलिस को अपना तरीका बदलना पड़ा।

खूफिया आफीसर ने बताया,”जो नक्सल मूवमेंट में शामिल नहीं होना चाहते थे, जेल से बाहर आने के बाद वे भी नक्सलियों के गिरोह में शामिल होने लगे। हमारे लिए यह एक बड़ी नाकामी थी। इसके बाद हमने अपनी पालिसी बदली। अब उन्हें गिरफ्तार करने के बजाय हम उन्हें सलाह मशविरा देकर समाज की अहम स्ट्रीम में भेजने लगे। इस तरीके से हम ज्यादा नौजवनओ को समझाने में कामयाब रहे। इसलिए आईएस की ओर रागिब हो रहे नौजवानो को रोकने के लिए भी हम यही तरकीब अपना रहे हैं।”

ऑफिशल के मुताबिक,”हम नौजवानो के वालिदैन को उनकी हरकतों के बारे में सुकून से आगाह करते और समझाते हैं। हम उन्हें इस बारे में उठाए जाने वाले जरूरी कदमों के बारे में भी समझाते हैं। अगर हमें जरूरत पड़ती है तो हम इमाम, मज़हबी रहनुमाओं और फिर्को के बड़े-बुजुर्गों की भी मदद लेते हैं।

जब हम बड़ों को बताते हैं कि उनके बच्चे जिहाद के इरादे से इराक या सीरिया जाने वाले थे तो वह शॉक्ड रह जाते हैं। ”

यूएसए से वापस आए सलमान मोहिनुद्दीन की मिसाल देते हुए खूफिया आफीसर ने बताया,”सलमान के केस में हमसे थोड़ी देर हो गई। हमें उसे अरेस्ट करना पड़ा क्योंकि वह पूरी तरह से इंतेहा पसंद का शिकार हो गया था। हमने गलती से उसका नाम आवामी कर दिया।

वह भी आईएस के प्रॉपेगैंडा के छलावे में आ गया था। ऐसे मामलों में हम जल्दी किसी का नाम आवामी नहीं करते क्योंकि अगर एक बार किसी पर दहशतगर्द होने का धब्बा लग जाता है, उसके लिए एक नॉर्मल लाइफ जी पाना मुश्किल होता है।”

TOPPOPULARRECENT