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“इस्लाम किसी किस्म की इबादत का नहीं बल्कि किरदार का नाम है”

नई दिल्ली: दीने इस्लाम किसी तरह की ईबादत का नाम नहीं है बल्कि किरदार का नाम है। यह बात याद याद रहनी चाहिए कि नमाज़, रोज़ा, जकात और हज, यह सारी इबादतें केवल रास्ता बताने का ज़रिया है। क्योंकि इस्लाम वह मजहब है जो चरित्र निर्माण की शिक्षा देती है।

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इस्लाम के संबंध से बातें आम हो रही हैं, वह इस्लाम से वाबस्ता ही नहीं हैं, जिसकी अहम वजह यह है कि हम इस्लाम को बताते ही नहीं हैं। इस्लाम यह कहता है कि आप शाम को सोने के लिए लेटे और आप के पड़ोस का एक गैर मुस्लिम भूखा है और आपको मालूम होने के बाद भी आप अपनी नींद को छोड़ नहीं पाए और सो गए, तो आप सोये तो मुसलमान हैं मगर सुबह आप मुसलमान नहीं रहेंगे।

यह है इस्लाम जिसमें इंसानियत के अलावा कुछ और बात ही नहीं की गई है, मगर अफ़सोस आज लोग इस्लाम को आईएस से ले रहे हैं, क्योंकि उनको इस्लाम बताया ही नहीं जा रहा है। इन विचारों का इज़हार शिया के प्रसिद्ध स्कॉलर डॉक्टर कल्बे सादिक ने इंडिया इस्लामिक कल्चरल सेंटर में आयोजित हुसैन दिवस के मौके पर आयोजित एक प्रोग्राम में किया।

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