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3 साल की मासूम बेटी को छोड़कर सन्यास ले रही थी मां, बाल आयोग ने रोक लगाई

अपनी तीन साल की बच्ची को छोड़कर सन्यास लेने जा रहे जोड़े में से पत्नी के सन्यास लेने पर बाल आयोग ने रोक लगा दी है । मध्य प्रदेश के नीमच में जैन समाज का जोड़ा अपनी तीन साल की बच्ची को छोड़कर संन्यास लेने जा रहा था । बच्ची के साथ वो अपने पीछे 100 करोड़ रुपये की संपत्ति भी छोड़ रहे थे ।

लेकिन अब बाल आयोग ने पत्नी के संन्यास लेने पर रोक लगा दी है। राठौड़ दम्पती न केवल 100 कड़ोड़ की संपत्ति बल्कि आपनी तीन साल की बेटी को छोड़ दीक्षा लेने जा रहे थे । महज तीन साल की बेटी का त्याग कर सन्यास लेने वाले दम्पती के खिलाफ बाल आयोग में शिकायत हुई थी जिसके बाद अधिकारियों से हुई बातचीत के बाद देर रात अनामिका राठौड़ की दीक्षा को रोक दिया गया है क्योंकि 3 साल की बच्ची इभ्या को मां की जरूरत ज़्यादा है ।

नीमच के रहने वाले 35 साल के सुमित राठौड़ लंदन में जॉब करने के बाद अपने घर नीमच लौटकर अपना कारोबार संभाला और फिर अरबों के मालिक बन गए । उनकी पत्नी अनामिका इंजीनियर है और नौकरी भी कर चुकी हैं। शादी के 4 साल बाद 23 सितंबर को पति के ही साथ अनामिका दीक्षा ले रही थीं ।

परिवार के साथ दीक्षा देने वाले साधुमार्गी जैन आचार्य रामलाल जी महाराज ने भी अनामिका को समझाया ।  बेटी का हवाला देकर संन्यास की इजाजत नहीं दी लेकिन सुमित और अनामिका अपने फैसले पर अडिग रहे। हालांकि सुमित का परिवार एक संयुक्त परिवार है लेकिन अभी तक ये तय नहीं हो पाया है कि उनकी बिटिया इभ्या अपने दादा-दादा के साथ रहेगी या फिर नाना-नानी के साथ ।

वहीं दीक्षा समारोह में आए रेलवे राज्य मंत्री मनोज सिन्हा ने जैन दम्पती के इस साहसिक कदम की तारीफ करते हुए कहा कि देश में आस्था-आध्यात्म का अलग महत्व है। इनकी जितनी प्रशंसा की जाये कम है। ऐसे लोगों का हृदय से अभिनंदन करते हैं।

हालांकि शानो-शौकत, करोड़ों की संपत्ति को ठोकर मारकर संन्यासी बनने का ये कोई पहला मामला नहीं है । लेकिन सुमित और अनामिका के संन्यास लेने के इस फैसले पर सवाल उठ रहे हैं । सवाल इसलिए भी उठ रहे हैं क्योंकि जब मासूम इभ्या को सबसे ज्यादा ज़रूरत माता-पिता की होगी तब वो उन्हें अपने आस-पास कभी नहीं पायेगी।

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