जामिया मिल्लिया ने मनाया 150 साल का जश्न और संस्थापक की कब्र इतिहास में गायब

जामिया मिल्लिया ने मनाया 150 साल का जश्न और संस्थापक की कब्र इतिहास में गायब

नई दिल्ली। पांचकुआं रोड पर हसन रसूल की झुग्गी कम्पाउंड के अंदर अनेक घर हैं। उनके बीच में सूफी संत यूनानी चिकित्सा के अग्रणी और जामिया मिलिया इस्लामिया के सह-संस्थापक हकीम अजमल खान का मकबरा है जो नामी हकीम और स्वतंत्रता सेनानी और गांधीजी के समकालीन थे और उन्होंने खिलाफत आंदोलन में भाग लिया था। लेकिन आज उनका नाम एक सड़क और केंद्रीय दिल्ली के एक पार्क के नाम पर ही सुना जाता है।

बल्लीरमन क्षेत्र में अपनी पुस्तैनी हवेली में रह रहे खान के नाती मसरूर अहमद ने कहा कि परिवार के कुछ लोग भारत में हैं बाकी पाकिस्तान चले गए और वहां एक यूनानी चिकित्सा व्यवसाय की स्थापना की। उनके मकबरे के निकट रह रहे मोहम्मद इमरान ने कहा कि पाकिस्तान से उनके रिश्तेदारों का यहां नियमित रूप से आना और उनकी कब्र पर हाजिरी देना रहना जारी रहता है।

उनकी कब्र एक अलग ही आकार में है और इसमें उनका नामफलक वाला पत्थर भी नहीं है। इमरान ने कहा कि यह पाकिस्तानी रिश्तेदार थे जो यहां आए थे और लोहे की ग्रिल्स लगाई थी क्योंकि यह पूरी जगह कब्रों से भरी हुए है। अहमद ने हालांकि कहा कि कब्र के आसपास रहने वाले लोगों ने अतिक्रमण कर रखा है।

इतिहासकार राणा सफ़ी ने हालांकि कब्र की स्थिति के लिए परिवार पर आरोप लगाया कि परिवार कब्र के लिए और अच्छा कर सकता था। उन्हें वहां नियमित रूप से जाना चाहिए और दुआ करनी चाहिए। इस बीच, जामिया ने सोमवार को अपनी 150 वीं वर्षगांठ मनाई। जब मैं यहां आया था तो सम्मान के लिए उनके नाम पर कुछ भी नहीं था।

इसके बाद हमने उनके नाम पर कार्यक्रम शुरू करने का फैसला किया और विश्वविद्यालय के प्रेमचंद अभिलेखागार में एक प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। वाइस चांसलर तलत अहमद ने कहा विश्वविद्यालय ने अब यूनानी चिकित्सा पर पीएचडी और डिप्लोमा कोर्स शुरू किया है।

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