जम्मू कश्मीर: कहानी का दूसरा पहलु यह है!

जम्मू कश्मीर: कहानी का दूसरा पहलु यह है!
सांकेतिक फोटो

इस लेख में मैं कश्मीर में जारी हिंसा के बारे में लिखना चाहता हूँ। इसके जरिए मैं देश के उन नौजवानों को सच बताना चाहता हूँ जो कश्मीर की कहानी का सिर्फ एक हिस्सा जानते हैं। पिछले दिनों कश्मीर के 3 नागरिकों को हत्या करने के आरोप में फौजियों के खिलाफ ऍफ़आईआर दर्ज की गई हैं।

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उसके जवाब में फौजियों के बच्चों ने कार्रवाई की। एक रिपोर्ट के मुताबिक ऐसे समय में जब जम्मू कश्मीर में फौजियों के खिलाफ ऍफ़आईआर दर्ज करने और पत्थरबाजों के खिलाफ केस समाप्त करने का विषय राष्ट्रीय चर्चा का हिस्सा बन चूका है, आर्मी ऑफिसरों के बच्चे राष्ट्रीय मानवधिकार आयोग से मदद मांग रहे हैं। उनका कहना है कि आयोग पत्थरबाजों के हिंसा से फौजियों की सुरक्षा करे।

प्रीति, काजल और प्रभु एनएचआरसी के चीफ जस्टिस एचएल दत्तो के पास यह शिकायत लेकर गए जिसमें मानवधिकार के सुरक्षा के लिए शाबाशी दी गई लेकिन साथ ही यह भी कहा गया है कि वह फौजियों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए काम नहीं कर रहे हैं जिनकी जिंदगी हमेशा खतरे में होती है और पत्थरबाज़ उन्हें कभी भी निशाना बना सकते हैं। यह एक एसी युद्ध है जो भारत की आज़ादी के बाद से जारी है। उसके मद्देनजर जम्मू कश्मीर की सरकार और केन्द्रीय सरकार ने यहाँ अफसपा लागु करने का फैसला किया। हम सब उस कहानी के बारे में जानते हैं। मैं चाहता हूँ कि भारत के नौजवान खासकर बच्चे, इस कहानी का दूसरा हिस्सा पढ़ें। जनवरी में संसद में सुरक्षा मंत्रालय से नीचे दिए गये सवाल पूछे गए थे:

क्या सुरक्षा मंत्री यह बता सकते हैं कि (1) अफसपा 1990 के तहत सशस्त्र फौजियों के किसी जवान के खिलाफ कार्रवाई के लिए जम्मू कश्मीर की ओर से केन्द्रीय सरकार को प्राप्त होने वाले मुकदमे की संख्या कितनी है?
(2) क्या उन मुकदमों की संख्या बताई जा सकती है जो अभी लंबित हैं, स्वीकार कर लिए हैं या ख़ारिज कर दिए गए हैं? (3) हर आवेदन की डिटेल, फाइलिंग की तारीख़ के साथ, कथित जुरमाना, जांच के नतीजे और उनके खिलाफ कार्रवाई कहाँ तक पहुंची? (4) स्टाफ के उस व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई न करने या मुकदमे ख़ारिज करने की वजह? उन सवालों के जवाब रक्षा मंत्रालय ने कुछ यूँ दिए:

(1) अफसपा 1990 के तहत सशक्त फौजियों के किसी व्यक्ति के खिलाफ दर्ज मुकदमे की संख्या 50 है जो केन्द्रीय सरकार को जम्मू कश्मीर सरकार की ओर से प्राप्त हुई हैं। (2-3) एक ऐसा दस्तावेज़ प्राप्त किया गया जो हर साल प्राप्त होने वाले संयुक्त मुकदमे की डिटेल प्राप्त करता है, जिसमें कथित जुरमाना और ख़ारिज और स्वीकार होने वाले मुकदमे की संख्या भी दर्ज है। स्टाफ के किसी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई न करने या मुक़दमा खारिज करने की वजह सबूत के लिए काफी नहीं हैं।

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