येरुशलम के अल-अक्सा मस्जिद के पास एक हिस्सा भारतीय के हाथों में

येरुशलम के अल-अक्सा मस्जिद के पास एक हिस्सा भारतीय के हाथों में
Click for full image

येरुशलम : हेरोड्स गेट और अल-अस्का मस्जिद के बीच येरुशलम के पुराने क्वाटर्स में पिछले 800 सालों से एक कोना भारत के नाम है। इस भारतीय धर्मशाला की स्थापना सूफी संत ख्वाजा फरीदुद्दीन गंजशाकर (बाबा फरीद) ने 13वीं शताब्दी में की थी। वर्ष 1200 के आसपास, सलाहुद्दिन अय्युबी की सेनाओं ने यरूशलम शहर से क्रूसेडर (सलेबी) को शहर से बाहर खदेड़ने को मजबूर कर दिया था, एक दशक से भी कम समय में, एक भारतीय दरवेश हजरत फरीद उद-दीन गंज शकर यरूशलेम गए।

हजरत फरीद उद-दीन गंज शकर (या बाबा फरीद, जैसा कि सभी बेहतर जानते हैं) सूफी संत चिस्ती से संबंधित थे, जो आज भी पूरे भारत, पाकिस्तान और अफगानिस्तान में फैले हुए हैं। उन्होंने अपने दिनों में अल-अक्सा मस्जिद के चारों ओर पत्थर के फर्श को साफ किया करते थे, शहर की दीवारों के अंदर एक गुफा में चुप्पी में उपवास किया करते थे। कोई नहीं जानता कि बाबा फरीद शहर में कब तक रहे। लेकिन पंजाब लौटने के कुछ समय बाद, जहां वह अंततः चिस्ती के प्रमुख बन गए.

भारतीय मुसलमान मक्का के रास्ते यरूशलेम जाकर गुज़रने समय यहां प्रार्थना करना शुरू किए, जहां बाबा फरीद इबादत की थी, जहां वह सोते थे। धीरे-धीरे, वहां बाबा फरीद की स्मृति में एक तीर्थयात्रा या तीर्थयात्रा लॉज बन गया. आठ सदियों से अधिक, वह लॉज अभी भी वहां मौजूद है। और यद्यपि यह यरूशलेम की दीवारों के अंदर खड़ा है यह अभी भी भारतीय हाथों में है। लॉज का वर्तमान प्रमुख, 86 वर्षीय मुहम्मद मुनीर अंसारी, द्वितीय विश्व युद्ध से पहले के वर्षों में वहां बड़ा हुआ, जब फिलिस्तीन गेट के बाहर लोग बसने लगे थे।

हजरत ख्वाजा फरीद्दुद्दीन गंजशकर (उर्दू: حضرت بابا فرید الدین مسعود گنج شکر) भारतीय उपमहाद्वीप के पंजाब क्षेत्र के एक सूफी संत थे। आप एक उच्चकोटि के पंजाबी कवि भी थे। सिख गुरुओं ने इनकी रचनाओं को सम्मान सहित श्री गुरु ग्रंथ साहिब में स्थान दिया।

वर्तमान समय में भारत के पंजाब प्रांत में स्थित फरीदकोट शहर का नाम बाबा फरीद पर ही रखा गया था। बाबा फरीद का मज़ार पाकपट्टन शरीफ (पाकिस्तान) में है। बाबा फरीद के शिष्यों में निजामुद्दीन औलिया को अत्यधिक प्रसिद्धि प्राप्त हुई। वास्तव में बाबा फरीद के आध्यात्मिक एवं नैतिक प्रभाव के कारण उनके समकालीनों को इस्लाम के समझाने में बड़ी सुविधा हुई।

बरहाल, जेरूसलम के हेरोड्स गेट के पीछे की संकरी गलियों में काफी चहल कदमी और शोर-शराबा रहता है। वहां लाइन से कई फलों की, किराने का सामान और मोबाइल फोन की दुकानों हैं। वहीं इलाके की सुरक्षा के लिए इस्राइली सैनिक सभी जगहों पर तैनात हैं। धर्मशाला में दाखिल होते ही शांति का एहसास होता है। पिछले करीब 90 सालों से अधिक समय से मूल रूप से उत्तर प्रदेश के सहारनपुर का रहने वाला अंसारी परिवार इस धर्मशाला की देख-रेख कर रहा है।

हालांकि, इस परिवार के सदस्यों ने स्थानीय फिलिस्तीनी लोगों से शादी कर ली है। लेकिन उन सभी के पास भारतीय पासपोर्ट हैं। इसके अलावा धर्मशाला के अंदर एक छोटी सी मस्जिद है, जहां भारतीय झंडा लगा है। धर्मशाला की वर्तमान में देखरेख करने वाले नजीर अंसारी कहते हैं कि यह सभी मतों को मानने वाले भारतीय तीर्थयात्रियों का गेस्ट हाउस है। सदियों से अल-अक्सा मस्जिद में प्रार्थना करने आने वाले भारतीय यहां रुकते रहे हैं।

Top Stories