झारखंड और दादरी: क्या कहते हैं भीड़ द्वारा पीट- पीट हत्या के दोनों केस?

झारखंड और दादरी: क्या कहते हैं भीड़ द्वारा पीट- पीट हत्या के दोनों केस?

झारखंड के रामगढ़ जिले की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने बुधवार को मीट कारोबारी अलीमुद्दीन अंसारी की मॉब लिन्चिंग के मामले में 11 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई। गत वर्ष 29 जून को हुए इस जघन्‍य हत्‍याकांड में अदालत ने मात्र एक साल के अंदर सजा सुना दी।

उधर, यूपी के दादरी में इसी तरह से भीड़ द्वारा पीट-पीटकर मार डाले गए मोहम्‍मद अखलाक के परिजन इस वीभत्‍स घटना के 906 दिन बीतने के बाद भी ट्रायल के इंतजार में हैं।

गाय के नाम पर भीड़ द्वारा की गई इन दोनों हत्‍याओं में कार्रवाई देश के दो राज्‍यों में अलग-अलग तरीके से हुई। झारखंड के हजारीबाग के मीट कारोबारी अलीमुद्दीन अंसारी की बीफ ले जाने के आरोप में भीड़ ने पीट-पीट कर हत्या कर दी थी।

इस मामले में मृतक की पत्नी ने 12 लोगों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज कराई थी। हाइकोर्ट की निगरानी में पूरे मामले की सुनवाई चली और रोज सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया गया था।

कोर्ट ने 16 मार्च को आरोपी दीपक मिश्रा, छोटू वर्मा, संतोष सिंह, विक्की, सिकंदर राम, विक्रम प्रसाद, राजू कुमार, होरित ठाकुर, नित्यानंद, कपिल ठाकुर और उत्तम कुमार को आईपीसी की धारा 12 बी, 147, 148, 427/149, 435/149, 302/149 के तहत दोषी करार दिया था। मामले में नाबालिग आरोपी के खिलाफ अभियोजन पक्ष द्वाप बालिग के तौर पर कार्रवाई किए जाने की मांग कोर्ट से की गई थी।

अलीमुद्दीन की हत्‍या से पहले 28 सितंबर 2015 को गोहत्या के शक में बिसाहड़ा में अखलाक की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। इस मामले में अभी तक सुनवाई भी शुरू नहीं हुई है। मामले के 18 आरोपियों में से एक की मौत हो गई है और 17 अन्‍य जमानत पर चल रहे हैं। अखलाक हत्‍याकांड की ग्रेटर नोएडा की फास्‍ट ट्रैक अदालत में सुनवाई चल रही है।

मॉब लिन्चिंग के दौरान बुरी तरह से घायल हो गए अखलाक के बेटे दानिश ने कहा, ‘हम जानते हैं कि वक्‍त पर न्‍याय न मिलना, न्‍याय न मिलने के समान है। हमारा मानना है कि यूपी सरकार ने झारखंड सरकार के विपरीत मामले को ठीक तरीके से उठाया नहीं।’ अब परिवार के साथ दिल्‍ली में रहे दानिश ने कहा कि उन्‍हें अब भी आशा है कि न्‍याय मिलेगा।

अखलाक के परिवार के वकील युसूफ सैफी ने बताया कि अब तक 35 बार सुनवाई हो चुकी है। उन्‍होंने कहा, ‘बचाव पक्ष के वकील आरोप तय होने में बाधा डाल रहे हैं। हरेक सुनवाई के दौरान एक न एक आवेदन लेकर अदालत के समक्ष पहुंच जाते हैं और आरोपियों पर लगाए गए आरोपों का विरोध करते हैं। इसी वजह से आरोप तय होने में बाधा आ रही है।’ उन्‍होंने बताया कि इस मामले में अब अगली सुनवाई 23 अप्रैल को होने वाली है।

दिल्‍ली में रहने वाले वकील दिलजीत सिंह अहलूवालिया इस बात पर आश्‍चर्य जताते हैं कि अखलाक मर्डर में अभी तक सुनवाई नहीं शुरू हुई है। उन्‍होंने कहा कि सीआरपीसी इस तरह के सभी मामलों में प्रतिदिन सुनवाई की व्‍यवस्‍था है।

साभार- NBT

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