झारखंड राज्य हज कमेटी में, भाजपा के 7 और आरएसएस के 3 लोग हुए शामिल

झारखंड राज्य हज कमेटी में, भाजपा के 7 और आरएसएस के 3 लोग हुए शामिल
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रांची : झारखंड राज्य हज समिति के गठन पर झारखंड के मुस्लिम संगठनों ने से एक नया विवाद उठाया है। मुस्लिम संगठनों ने सवाल उठाया है कि हज समिति का चयन हज समिति अधिनियम 2002 की धारा 18 के  खिलाफ हैं। सरकार से आरोप लगाया गया है कि समिति में शामिल अधिकांश लोग संघ और बीजेपी से जुड़े हुए हैं।

बहस का मुद्दा यह है कि मुख्तार अब्बास नकवी केंद्रीय अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री और झारखंड से राज्यसभा सदस्य हैं। इसके आधार पर, उन्हें झारखंड राज्य हज समिति के सदस्य के रूप में नामांकित किया गया है। झारखंड कल्याण विभाग ने 9 जुलाई को राज्य हज समिति के गठन के लिए 15 सदस्यों की एक सूची की घोषणा की और 45 दिनों के भीतर समिति के अध्यक्ष का चयन किया जाना है, लेकिन इससे पहले मुस्लिम संगठन और समाजीक कार्यकर्ता इस मामले में अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं और हज समिति के भंग करने की मांग कर रहे है।

सामाजिक कार्यकर्ता मोहम्मद नदीम खान ने इस मामले पर संजीदा दिखे उन्होने कहा की एक गैर राजनीतिक प्लेटफॉर्म पर ज्यादा से ज्यादा राजनीतिक लोगों को सदस्य के रूप में शामिल करना किसी भी रूप में ठीक नहीं हैं। हज कमेटी में उन लोगों को शामिल किया गया है जिसके लिए ये योग्य नहीं हैं और न ही समाज में उनकी उपस्थिति किसी रूप में है आखिर ये गैर जरूरी लोग किस रूप में हज कमेटी को योगदान करेंगे। ये लोग सरकार के कठपुतली हैं। अल्पसंख्यक अदारों और बुद्धिजीवियों को इसमें शामिल नहीं किया गया है। उन्होने ये भी कहा की आज तक अल्पसंख्यक आयोग की रिपोर्ट जो पूर्व अध्यक्ष शाहिद अख्तर ने रिपोर्ट बनाई थी उस पर अमल में नहीं लाया गया है और न ही विधान सभा में चर्चा की गई है।

सामाजिक कार्यकर्ता तनवीर अहमद के अनुसार मुजफ़्फ़रपुर दंगे के आरोपी इंद्रेश कुमार के अगुवाई में राष्ट्रिए मुस्लिम मंच के सदस्य फराहाना और तनवीर अब्बास को हज कमेटी का सदस्य बनाया गया है जो आरएसएस का विंग है। उन्होने ज़ोर देकर मांग की है की जल्द से जल्द हज कमेटी के इन सदस्यों की सदस्यता भंग होनी चाहिए। उन्होने हज खर्च में GST को भी हटाने के मांग की है जैसे सीख समुदाय के लंगर खाने में GST को हटाया गया है उसी तर्ज़ पर हज खर्च में भी GST हटाया जाय। हालांकि सामाजिक कार्यकर्ता एस अली इस मामले में अदालत जाने में मजबूर हुए हैं।

नदीम खान के अनुसार सरकार ने हज समिति अधिनियम 2002 की धारा 18 के कई बिंदुओं को अनदेखा करके हज समिति गठित की है। उनके अनुसार हज कमेटी का गठन में कई त्रुटियां हैं। हज कमेटी में अनुभवी सामाजिक कार्यकर्ताओं को सदस्य बनाया जाता रहा है, लेकिन इस बार समिति में भाजपा और संघ से जुड़े लोगों को प्राथमिकता दी गई है। वे कहते हैं कि यह समिति एक राजनीतिक दल की तरह है, जिसमें एक ही विचारधारा के लोग शामिल हैं।

इन स्रोतों के मुताबिक हज समिति में बीजेपी के 7 और राष्ट्रिए मुस्लिम मंच (RSS का अल्पसंख्यक विंग) से 3 लोग शामिल हैं। इसमें भाजपा से काज़िम कुरैशी, मोहम्मद फिरोज अंसारी, रिजवान खान, इरफान अहमद, व अन्य शामिल हैं। राष्ट्रिए मुस्लिम मंच से फराहाना और वकील तनवीर अब्बास को शामिल किया गया है। झारखंड राज्य हज कमेटी के गठन को लेकर मुस्लिम संगठनों ने राज्यपाल, सीएम, झारखंड के वेल फेयर सचिव, मुख्य सचिव और केंद्रीय अल्पसंख्यक मंत्रालय को लिखित शिकायत कर मांग की है कि समिति को रद्द कर के हज समिति अधिनियम 2002 की धारा 18 के आलोक में गठित की जाए।

कांग्रेस विधायक इरफान अंसारी ने कहा कि हज समिति का गठन सिद्धांत रूप में किया गया है। यह संघ और बीजेपी के लोगों से भरा है। यह एक फ्रेंचाइजी समिति है। उन्होंने मांग की कि समिति को हज अधिनियम के अनुसार खारिज कर दिया जाना चाहिए और फिर से गठित किया जाना चाहिए।

प्रदेश कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग के प्रवक्ता वारिस कुरैशी ने कहा कि 30 जुलाई से हाजियों का जत्था रांची से जद्दा के लिए उड़ान भरेगी उन्होंने कहा कि हज कमेटी का काम हज के समय में बहुत महत्वपूर्ण होता है। राज्य से जाने वाले हाजियों को किसी तरह की कोई परेशानियों का सामना न करना पड़े, इसके लिए हज कमेटी विशेष कार्य करती है। लेकिन रघुवर सरकार की नीयत हज यात्रियों के प्रति ठीक नहीं है। यही कारण है कि मुख्यमंत्री रघुवर दास अपने शासनकाल में कभी भी इन हज यात्रियों से रांची एयरपोर्ट जाकर मिलने की आवश्यकता नहीं समझी ।

गौर तलब है की  15 सदस्यीय राज्य हज कमेटी के मनोनयन की अधिसूचना पिछले दिनों जारी हुई है । रांची की फरहाना खातून को कमेटी में रखा गया है जो मुस्लिम राष्ट्रिए मंच की सदस्य हैं । यह पहला मौका है जब किसी महिला को सदस्य बनाया गया है।

सदस्यों में ये हैं शामिल : इसमें केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी के अलावा विधायक आलमगीर आलम, हजरत रिसालदार दरगाह कमेटी के महासचिव मो. फारूक, जाफरी एजुकेशनल के महासचिव इकबाल हुसैन फातमी, राष्ट्रीय मुस्लिम मंच की सदस्य फरहाना खातून, मंच के ही सदस्य तनवीर अब्बास, भाजपा नेता काजिम कुरैशी, मौलाना डॉ. गुलाम गौस, मो. इकरार उल अंसारी, मो. रिजवान खान, मो. फिरोज अंसारी, एदार-ए-शरीया के प्रिंसिपल मो. मुजीबुर्रहमान, इरफान अहमद, मो. जाहिद हुसैन और महफूज आलम शामिल हैं।

कमेटी में 7 सदस्य रांची से, 2 धनबाद, 1 पाकुड़, 1 गोड्डा, 1 जमशेदपुर, 1 कोडरमा और 1 सदस्य दुमका से लिए गए हैं। इधर, मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के राष्ट्रीय संयोजक डॉ. शाहिद अख्तर, रिसालदार बाबा दरगाह कमेटी के सदर हाजी रऊफ गद्दी और रांची मुहर्रम कमेटी के महासचिव अकीलुर्रहमान आदि ने नई कमेटी का स्वागत करते हुए इसके लिए सीएम का आभार व्यक्त किया है।

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