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जम्मू-कश्मीर संघ सिविल सोसाइटी की रिपोर्ट : वर्ष 2003 के बाद से 318 बच्चों की मौत, ज्यादा हुए गोली का शिकार

जम्मू-कश्मीर में साल 2003 के बाद से हर साल कम से कम 26 बच्चे मारे गए हैं जो सरकारी बलों, आतंकवादियों, अज्ञात बंदूकधारियों, फटे हुए गोले के कारण विस्फोट या नियंत्रण रेखा में भारतीय और पाकिस्तानी सेनाओं के बीच गोलीबारी की वजह से मारे गए हैं।

घाटी के शीर्ष मानवाधिकार समूह जम्मू कश्मीर संघ सिविल सोसाइटी (जेकेसीसीएस) द्वारा जारी एक रिपोर्ट के अनुसार कुल 318 बच्चों में से 144 जम्मू-कश्मीर पुलिस सहित सरकारी बलों द्वारा मारे गए, जबकि अज्ञात बंदूकधारियों ने कम से कम 147 बच्चों को मौत के घाट उतारा और 12 आतंकियों द्वारा मारे गए हैं।

रिपोर्ट में पता चला है कि सरकारी बलों द्वारा 110 बच्चों की हत्या की गई । इस रिपोर्ट के लिए डेटा जेकेसीसीएस अनुसंधान टीमों द्वारा आयोजित फील्ड कार्य के माध्यम से एकत्रित किया गया। जेकेसीसीएस की रिपोर्ट में कहा गया है कि जम्मू और कश्मीर में बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए कोई कानूनी और मानक प्रक्रिया या प्रथाएं नहीं हैं और इन जघन्य अपराधों (बच्चों के खिलाफ) के अपराधियों में से कोई भी आज तक न्याय के लिए आगे नहीं आया।

जम्मू-कश्मीर लोक निर्माण मंत्री और जम्मू कश्मीर सरकार के आधिकारिक प्रवक्ता नईम अख्तर ने कहा कि यह (बच्चों की हत्या) त्रासदी है। ये जम्मू और कश्मीर के बच्चे ही नहीं, भारत के बच्चे हैं। हमें मानवीय नजर से कश्मीर को देखना चाहिए। 63 पन्नों की रिपोर्ट पिछले पन्द्रह वर्षों में जम्मू और कश्मीर में बच्चों के खिलाफ हिंसा का आकलन करती है और हत्याओं, गिरफ्तारी, जन हिंसा, बच्चों के खिलाफ यौन उत्पीड़न का आंकलन है।

2003 से 2017 तक की पन्द्रह वर्ष की अवधि में, जम्मू और कश्मीर में हिंसा के विभिन्न घटनाओं में बच्चों की 318 हत्याओं (1 से 17 साल आयु वर्ग के) में कम नहीं देखा गया। 318 बच्चों की हत्या पिछले पंद्रह वर्षों में नागरिक हत्याओं का 6.95 फीसदी है, जैसा कि इसी अवधि में 4,571 नागरिक मारे गए हैं। इसी अवधि में, जम्मू और कश्मीर में कम से कम 16,436 हत्याएं दर्ज की गईं और उनमें से अधिकांश कम से कम 8537 हत्याओं की कथित आतंकवादी शामिल थे।

कुल 318 हत्याओं में से 214 कश्मीर में जबकि जम्मू प्रभाग में 96 हत्याएं हुईं और शेष आठ के स्थान का पता लगाया नहीं जा सका। जम्मू एवं कश्मीर में भारतीय सशस्त्र बलों और राज्य पुलिस ने कम से कम 144 बच्चों को मार दिया।

हिंसा की विभिन्न घटनाओं में अधिकांश बच्चों, कम से कम 110, राज्य हिंसा में मारे गए, गोली मार दी गई गोलीबारी से हुई गोलीबारी से हुई चोटों की वजह से आठ बच्चों की मौत हुई। आतंकियों ने कम से कम 12 बच्चों को मार गिराया है जिनमें से अधिकांश विस्फोटों और विस्फोटक यंत्र (आईईडी) के कारण मौत हुई हैं।

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