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JNU के छात्र कभी भी हिंसक नहीं रहे हैं: अमित सेनगुप्ता

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जेएनयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष अमित सेनगुप्ता, जिन्होंने हाल ही में प्रशासन के साथ मतभेदों का हवाला देते हुए आईआईएमसी से इस्तीफा दे दिया था, ने अपने दिनों को याद करते कहा “जेएनयू के छात्र न कभी हिंसक थे और न ही होंगें |

सेनगुप्ता, ने जेएनयू में छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि हमें हिंसक बताया जाता है जब हमारे छात्र नेता चंदू वर्ष 1997 में बिहार में मारा गया था हमने जब हिंसा नहीं की , जब सरकार ने 1983 में विश्वविद्यालय को बंद करने की कोशिश की हमने तब हिंसा नहीं की और आज जब हमारे छात्र संघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार पर हमला किया गया हम अब भी अहिंसक हैं |

उन्होंने कहा कि “यह जेएनयू की परंपरा है हम हिंसा की नहीं विचारों की लड़ाई लड़ते हैं” |

उन्होंने विश्वविद्यालय में अपने दिनों को याद करते हुए उस आन्दोलन के बारे में भी बात की जो 1983 के दौरान छात्रों द्वारा विश्वविद्यालय को बंद करने की कोशिश के ख़िलाफ़ किया गया था | जब विश्वविद्यालय दोबारा शुरू हुआ उस वक़्त लड़कियों के हास्टल में जनसभा बंद कर दी गयीं थीं | लेकिन 1989 में हमारा कैम्पस दुबारा पहले जैसा हो गया था |

सेनगुप्ता ने जेएनयूएसयू के पूर्व अध्यक्ष चंद्रशेखर(चंदू) मौत के बाद हुए छात्र के आंदोलन के बारे में भी बात की है वर्ष 1997 में बिहार के सीवान में चंदू को उनके अपने गृहनगर में वहाँ राजनीतिक नेताओं के क़रीबी कुछ गुंडों थे द्वारा मार दिया गया था |

उन्होंने कहा “हम अपने छात्र संघ अध्यक्ष के लिए न्याय की मांग की थी और एक महीने से अधिक के लिए लड़ाई लड़ी। उस समय पूरे देश की भावना हमारे साथ था। मीडिया हमारे साथ था, जनता, हमारे साथ था, क्योंकि वे जानते थे कि जो हुआ है गलत है, “|

हमें जेएनयू की परंपरा को बनाये रखने के लिए अपना आंदोलन जारी रखना चाहिए|

सेनगुप्ता ने पिछले सप्ताह भारतीय जनसंचार संस्थान प्रशासन पर ये आरोप लगाते हुए कि उनको जेएनयू, रहा है , भारतीय जनसंचार संस्थान से इस्तीफा दे दिया था।

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