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JNU में नहीं होगी भारतीय संस्कृति और योग की पढ़ाई, प्रस्ताव दूसरी बार ठुकराया

JNU में नहीं होगी भारतीय संस्कृति और योग की पढ़ाई, प्रस्ताव दूसरी बार ठुकराया

नई दिल्ली। जेएनयू में फ़िलहाल भारतीय संस्कृति और योग में शॉर्ट टर्म कोर्स नहीं कराए जाएंगे। विश्वविद्यालय ने ये प्रस्ताव फिर खारिज कर दिए। पिछले साल तीन विषयों में शॉर्ट टर्म कोर्स कराने का प्रस्ताव आया था। यह प्रस्ताव आरएसएस और दक्षिणपंथी संगठनों की पहल पर भारत की समृद्ध विरासत और संस्कृति को बढ़ावा देने के नाम पर लाया गया था।
मानव संसाधन विकास मंत्रालय और UGC से कई दौर की बातचीत के बाद जेएनयू ने पिछले साल अपने विभिन्न स्कूलों और विभागों की प्रतिक्रिया हासिल करने के लिए तीनों पाठ्यक्रमों का मसौदा उनके भेजा, जिसे जेएनयू के अकादमिक परिषद’ (एसी) ने पिछले नवंबर में खारिज कर दिया। इसके बाद मई में इस पर पुनर्विचार के लिए फिर विभागों को मसौदा भेजा गया। दिल्ली से प्रकाशित दैनिक जनसत्ता का कहना है कि तैयार मसौदे को पिछले सप्ताह एसी के समक्ष रखा गया जिसे बहुमत से सदस्यों ने अस्वीकार कर दिया। प्रस्तावित मसौदे के अनुसार, भारतीय संस्कृति में पाठ्यक्रम का उद्देश्य देश की संस्कृति के महत्व के साथ उसकी सामाजिक, आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और पौराणिक पहलुओं की व्याख्या करना और विश्व भर में भारतीय मूल्यों की स्थापना करना है।
मसौदे में कहा गया है ‘पाठ्यक्रम में अन्य बातों के अलावा भारतीय संस्कृति के धार्मिक पक्ष , परंपराएं, विचार एवं पाठ को शामिल किया जाएगा। इसमें वेद तथा महाकाव्यों और जातक कथाओं के चयनित अंश एवं रामायण के महाकाव्यों को पढ़ने का भी सुझाव है। मसौदे में आगे कहा गया है कि भारतीय साहित्य की मदद के बिना भारतीय संस्कृति को नहीं समझा जा सकता। हिंदू धार्मिक पुस्तकों, ग्रंथों का प्रकाशन करने वाले गोरखपुर के गीता प्रेस की रामायण और भगवद गीता, आचार्य जयदेव की वैदिक संस्कृति, रामधारी सिंह दिनकर की ‘संस्कृति के चार अध्याय’ सहित अन्य ग्रंथों के अध्ययन का सुझाव भी दिया गया है। मगर जे एन यू को यह पसंद नहीं आया। बताते हैं वाम प्रभाव वाले इस उच्च शिक्षण संसथान के किसी भी सदस्य को यह प्रस्ताव मंजूर नहीं।

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