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मोदी सरकार आने के बाद 50 फीसदी भारतीयों ने खाड़ी देशों में खोई अपनी नौकरी

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पिछले साल सऊदी अरब की यात्रा पर गए थे। उनकी इस यात्रा को मास्टरस्ट्रोक के तौर पर देखा गया था। इस यात्रा के बाद मीडिया और मोदी समर्थकों ने तर्क दिया कि मोदी ने जिस तरफ सऊदी के साथ दोस्ती गाठी है उससे पड़ोसी देश पाकिस्तान को काफी झटका लगा है।

लेकिन अब पीएम मोदी की इस यात्रा का बुरा असर खुद भारत पर पड़ता नज़र आ रहा है। ताजा आंकड़ों से पता चला है कि 50% सऊदी नौकरियां प्रधानमंत्री के इस यात्रा के बाद पाकिस्तान और बांग्लादेश में स्थानांतरित हो गई।

मोदी सरकार जब सत्ता में आई थी उस समय उसने दो करोड़ नौकरियों देने का वादा किया था। लेकिन अपने कार्यकाल का आधा समय बीत जाने के बादजूद ऐसा नहीं हो सका है। दूसरी तरफ बेरोजगारी की दर लगातार बढ़ती जा रही है। इस बात को राज्यसभा में राज्यमंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने भी स्वीकार किया।

ताजा आकड़ों से यह बात सामने आई है कि हाल के दिनों में पिछड़े तबकों में बेरोजगारी तेजी से बढ़ी है। राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान एक सवाल के जवाब में राव इंद्रजीत सिंह ने कहा कि कुल मिलाकर बेरोजगारी की दर बढ़ी है, लेकिन यह दर अन्य पिछड़ा वर्ग के बीच अधिक है।

उन्होंने कहा कि कुल बेरोजगारी दर पांच फीसदी है। जबकि यह ओबीसी के लिए 5.2 फीसदी है। साल 2013 में बेरोजगारी दर 4.9 फीसदी थी, जबकी 2012 में 4.7 फीसदी और 2011 में 3.8 फीसदी थी। वहीं, अनुसूचित जाति में यह दर साल 2011 में 3.1 फीसदी थी, जो अब बढ़कर 5 फीसदी हो गई है।

ताजा आकड़ों से यह पता चलता है कि मोदी सरकार न सिर्फ नौकरियों को बचाने में विफल रही, बल्कि खाड़ी देशों में जो नौकरियां भारतीयों को मिलती थी, वो स्थानांतरित हो पाकिस्तान और बांग्लादेश की तरफ चली गई। इस का मुख्य कारण नया इमिग्रेशन कानून में की गईं तब्दीलियां हैं।

सरकारी आंकड़ों से पता चलता है कि जो भारतीय प्रवासी श्रमिकों की संख्या नौकरी के लिए सऊदी अरब जैसे देशों में जाते थे, उसमें मोदी सरकार के सत्ता में आने की 50% से अधिक की गिरावट आई है।

साल 2013 में, 3,53,565 भारतीय सऊदी अरब में नौकरी के लिए वीजा प्राप्त किए, जबकि साल 2016 आते-आते इसकी संख्या घटकर केवल 65,356 रह गई। वहीं साल 2013 में 12,654 बांग्लादेशियों को खाड़ी देशों में रोजगार मिला। लेकिन 2016 में उनकी संख्या बढ़कर 1,43,913 पर पहुंच गई। जबकि 2013 में 6,36,721 पाकिस्तानियों को सऊदी अरब में रोजगार मिला, जो अब बढ़कर 2016 में 7,71,867 हो गई।

 

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