जॉर्डन ने इजरायल पर कसा शिकंजा, इजरायल में हड़कंप

जॉर्डन ने इजरायल पर कसा शिकंजा, इजरायल में हड़कंप
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जॉर्डन के शासक अब्दुल्लाह द्वितीय ने कहा है कि इस्राईल को सूचित किया जा चुका है कि अम्मान अपने दो सीमावर्ती इलाक़ों की लीज़ की अवधि नहीं बढ़ाएगा। उन्होंने बल दिया कि उनका देश दोनों इलाक़ों को 1994 में हुए शांति समझौते के तहत वापस लेने का संकल्प रखता है।

ये दो इलाक़े बाक़ूरा और ग़ूमर के नाम से जाने जाते हैं। बाक़ूरा जॉर्डन के उत्तरी इरबिद प्रांत में 6 वर्ग किलोमीटर का सीमावर्ता इलाक़ा है जो अतिग्रहित फ़िलिस्तीनी क्षेत्र के उत्तर में स्थित किनरेट झील के दक्षिण में स्थित है।

इसी तरह ग़ूमर जिसे ज़ोफ़र भी कहते हैं, जॉर्डन के दक्षिणी प्रांत अक़बा में 4 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल पर फैला दूसरा सीमवर्ती क्षेत्र है। यह डेड सी के दक्षिण में स्थित है।

26 अक्तूबर 1994 में जॉर्डन-इस्राईल के बीच हुयी शांति संधि के अनुसार, ये दोनों सीमावर्ती इलाक़े इस्राईल को 25 साल के लिए लीज़ पर दिए गए थे। इस समझौते के अनुसार, यह लीज़ ख़ुद बख़ुद फिर से आगे बढ़ जाएगी मगर यह कि दोनों पक्षों में से कोई भी एक साल पहले इस समझौते को ख़त्म करने का नोटिस दे।

न्यूज़ एजेंसी पेट्रा के अनुसार, जॉर्डन के शासक ने रविवार को कहाः “हम इस्राईल को सूचित कर चुके हैं कि बाक़ूरा और ग़ूमर से संबंधित शांति समझौते को ख़त्म करना चाहते हैं।”

शासक अब्दुल्लाह ने यह कहते हुए कि तेल अविव को अम्मान के फ़ैसले से रविवार को सूचित किया गया बल दिया कि दो सीमावर्ती क्षेत्र जॉर्डन के हैं और इस अरब देश का हिस्सा रहेंगे। यह समझौते आने वाले गुरुवार को ख़त्म हो जाएगा।

रविवार को ही ज़ायोनी प्रधान मंत्री बिनयामिन नेतनयाहू ने अपने बयान में कहा कि अम्मान लीज़ को ख़त्म करना चाहता है लेकिन तेल अविव उसके साथ बातचीत करेगा ताकि मौजूदा व्यवस्था संभवतः बनी रहे।

उन्होंने कहा कि इस बात में शक नहीं कि द्विपक्षीय समझौता एक अहम संपत्ति है। इस बिना तारीख़ की तस्वीर में बाक़ूरा का जॉर्डन नदी के ऊपर बना पुराना रेलगाड़ी का पुल दिखाई दे रहा है

समझा जाता है कि जॉर्डन के शासक पर इस देश की संसद की ओर से दबाव पड़ रहा है कि वह दोनों इलाक़ों की लीज़ की अवधि न बढ़ाएं और इन्हें पूरी तरह जॉर्डन की संप्रभुता में दाख़िल करें। जॉर्डन के 87 विधायक इस राष्ट्रीय मुद्दे को लेकर याचिका पर दस्तख़त कर चुके हैं।

साभार- ‘parstoday.com’

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