ईरान पर होने वाला असर इराक़, जॉर्डन, लेबनान और इज़राइल पर भी पड़ेगा- जॉर्डन किंग

ईरान पर होने वाला असर इराक़, जॉर्डन, लेबनान और इज़राइल पर भी पड़ेगा- जॉर्डन किंग

फ्रांस के टीवी चैनल फ्रांस 24 को दिए साक्षात्कार में जॉर्डन के राजा ने कहा कि इस बार इस्लामिक स्टेट सिर्फ दक्षिण सीरिया में ही नहीं बल्कि पश्चिमी इराक में भी सक्रिय हो रहा है।

 

डी डब्ल्यू पर छपी खबर के अनुसार, फ्रांस के टीवी चैनल फ्रांस 24 को दिए साक्षात्कार में जॉर्डन के किंग अब्दुल्लाह ने खाड़ी देशों में इस्लामिक स्टेट के फिर से संगठित होने की चेतावनी दी है।

समाचार एजेंसी एएफपी के मुताबिक फ्रेंच टीवी चैनल पर साक्षात्कार के दौरान जॉर्डन के राजा ने कहा, हमें इस्लामिक स्टेट के उदय से निपटना होगा। उनके मुताबिक सीरिया के कई विदेशी लड़ाके अब लीबिया में आ गए हैं।

किंग अब्दुल्लाह ने इस्लामिक स्टेट को रोकने के लिए यूरोप को खासतौर पर ध्यान देने को कहा।  उनके मुताबिक लीबिया की सीमा यूरोप के देशों से लगती हैै। इसलिए 2020 में यूरोप के लिए यह चर्चा का विषय होना चाहिए।

किंग अब्दुल्लाह ने इस साक्षात्कार में कहा कि आईएस के खिलाफ लड़ाई के दौरान कई लड़ाके सीरिया के इदलिब शहर को छोड़कर उत्तरी सीमा से लीबिया पहुंच गए थे। उन्होंने कहा कि यह लड़ाके अभी लीबिया में ही हैं. उत्तर अफ्रीका के इस देश और यूरोप के बीच भूमध्य सागर है।

 

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव पर भी जॉर्डन के राजा ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा, आने वाले महीनों में हम इलाके के लिए ऐसा काम करने की योजना बना रहे हैं।

जिससे तनाव को कम करने में मदद मिलेगी। फिलहाल स्थिति शांत लग रही है। इलाके में तनाव का महौल किसी के लिए भी अच्छा नहीं है।

जॉर्डन के राजा के मुताबिक ईरान पर होने वाला असर इराक, जॉर्डन, लेबनान और इस्राएल पर भी पड़ेगा।

लीबिया में तुर्की के सेना भेजने पर उन्होंने कहा कि यह सिर्फ असमंजस की स्थिति को बढ़ा रहा है। लीबिया के संघर्ष में दोनों पक्षों ने नौ महीने की लड़ाई को समाप्त करने के लिए सहमति व्यक्त की है।

 

पिछले साल नवंबर में आई संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि 2011 में गद्दाफी के तख्तापलट के बाद लीबिया पर हथियारों पर लगे प्रतिबंध के बावजूद कई देशों ने इसका उल्लंघन किया गया है।

जॉर्डन की स्थिरता को मध्य पूर्व के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। पड़ोसी युद्धग्रस्त देश सीरिया से लगभग 13 लाख शरणार्थियों को यह देश जगह दे चुका है।

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