Sunday , December 17 2017

VIDEO: पत्रकार प्रवीण जैन ने बताया बाबरी मस्जिद विध्वंस हादसा नहीं एक साजिश थी!

नई दिल्ली। अयोध्या में बाबरी विध्वंस के आज 25 साल पूरे हो गए हैं। 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में कार सेवा के नाम पर जुटे हजारों लोगों ने अचानक विवादित ढांचे पर चढ़ना शुरू कर दिया था और देखते ही देखते पूरा ढांचा ज़मीन पर आ गिरा।

उस दिन ये ढांचा गिरा और भारत में एक नई सियासी लकीर खिंच गई। आज उस घटना के पच्चीस साल पूरे होने पर अयोध्या समेत पूरे उत्तर प्रदेश और दिल्ली में सुरक्षा बढ़ा दिए गए हैं।

पच्चीस साल पहले आज ही के दिन ये विवादित ढांचा ढहा दिया गया। इन पच्चीस सालों में सरयू में न जाने कितना पानी बह गया और देश की एक पीढ़ी जवान हो गई लेकिन इस ढांचे कि गिराए जाने से जो धूल का गुबार उठा वो आज तक नीचे नहीं बैठ पाया।

6 दिसंबर 1992 की शाम से लेकर आज पच्चीस साल बाद तक इस जगह पर कुछ नहीं बदला है। अगर कुछ बदला तो टेंट के ये तिरपाल जिसके अंदर रामलला विराजमान हैं। जैसे धूल का गुबार नहीं थमा वैसे ही उस दिन की यादें फीकीं नहीं पड़ीं हैं।

जून 1989 में भाजपा ने विश्व हिंदू परिषद की मुहिम को अपना समर्थन दिया तो 9 नवंबर 1989 को तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने बाबरी मस्जिद के नजदीक शिलान्यास की इजाजत दी।

इसके बाद 25 सितंबर 1990 को पूर्व भाजपा अध्यक्ष लाल कृष्ण आडवाणी ने गुजरात के सोमनाथ से उत्तर प्रदेश के अयोध्या तक रथ यात्रा निकाली, इसी दौरान नवंबर में आडवाणी को बिहार के समस्तीपुर में गिरफ्तार कर लिया गया।

अक्टूबर 1991 में उत्तर प्रदेश में कल्याण सिंह सरकार ने बाबरी मस्जिद के आस-पास की 2.77 एकड़ ज़मीन को अपने अधिकार में ले लिया। उसके बाद 6 दिसंबर 1992 को हज़ारों कार सेवकों ने इस ढांचे को गिरा दिया।

सुबह साढे दस बजे से शुरू हुई इस विध्वंसक कार्रवाई ने शाम पांच बजे तक यहां पर एक सपाट मैदान बना दिया और आनन फानन में तिरपाल का इंतज़ाम करके रामलला को विराजमान कर दिया गया।

तब से आज तक ये तिरपाल बदलता रहता है, ड्यूटी में तैनात सिपाही बदलते रहते हैं और बदलता रहता है दांव पेंच का सिलसिला। अयोध्या आज देश के सियासी एजेंडे पर है।

TOPPOPULARRECENT