तस्वीरों में हज का सफर

  • लैबैक अल्ला हुम्मा लबाईक

    मुस्लिम तीर्थयात्रियों काबा सर्कल और ग्रैंड मस्जिद में प्रार्थना करते हुए ।

  • लैबैक अल्ला हुम्मा लबाईक

    मुस्लिम तीर्थयात्रियों द्वारा काबा सर्कल और ग्रैंड मस्जिद में प्रार्थना करते हूए ।

  • ग्रैंड मस्जिद में जुमे की नमाज के बाद

    ग्रैंड मस्जिद में शुक्रवार की प्रार्थना के बाद मुस्लिम तीर्थयात्री बाहर निकलते हूए ।

  • हज के अरकान

    मुस्लिम हज यात्री काबा सर्कल और ग्रैंड मस्जिद में प्रार्थना करते हूए ।

  • एक सेल्फ़ी यहाँ भी हो जाए

    एक मुस्लिम तीर्थयात्री अपने मोबाइल फोन के साथ फोटो लेता है जबकि अन्य काबा सर्कल करते हैं और ग्रैंड मस्जिद में प्रार्थना करते हैं।

  • काबे की तौव्वाफ

    मुस्लिम तीर्थयात्रियों द्वारा काबा सर्कल और ग्रैंड मस्जिद में प्रार्थना करते हूए ।

  • अपने रिशतेदारों से खैरियतदारी

    अफगानिस्तान से एक मुस्लिम तीर्थयात्री ग्रैंड मस्जिद के बगल में रात की प्रार्थनाओं के बाद फोन पर बात करते हूए ।

  • ग्रैंड मस्जिद में जुमे की नमाज़

    सऊदी अरब के पवित्र शहर मक्का, वार्षिक हज तीर्थयात्रा से पहले ग्रैंड मस्जिद में शुक्रवार की प्रार्थना के बाद मुस्लिम तीर्थयात्री बाहर निकलते हुए ।

इस्लाम के कुल पाँच स्तंभों में से हज पांचवां स्तंभ है. सभी स्वस्थ और आर्थिक रूप से सक्षम मुसलमानों से अपेक्षा होती है कि वो जीवन में एक बार हज पर ज़रूर जाएं. सऊदी अरब के मक्का शहर में काबा को इस्लाम में सबसे पवित्र स्थल माना जाता है. इस्लाम का यह प्राचीन धार्मिक अनुष्ठान दुनिया के मुसलमानों के लिए काफ़ी अहम है. इस साल उम्मीद है कि हज पर 20 लाख से ज़्यादा मुसलमान सऊदी अरब पहुंचेंगे.  दुनिया के कुछ हिस्सों से ऐसे हाजी भी पहुंचते हैं जो हज़ारों मील की दूरी महीनों पैदल चलकर तय करते हैं और मक्का पहुंचते हैं.

आधिकारिक तौर पर हज की शुरुआत इस्लामिक महीने ज़िल-हिज की आठ तारीख़ से होती है. आठ तारीख़ को हाजी मक्का से क़रीब 12 किलोमीटर दूर मीना शहर जाते हैं. आठ की रात हाजी मीना में गुज़ारते हैं और अगली सुबह यानी नौ तारीख़ को अराफ़ात के मैदान पहुंचते हैं. हज यात्री अराफ़ात के मैदान में खड़े होकर अल्लाह को याद करते हैं और उनसे अपने गुनाहों की माफ़ी मांगते हैं. शाम को हाजी मुज़दलफ़ा शहर जाते हैं और नौ तारीख़ की रात में वहीं रहते हैं. दस तारीख़ की सुबह यात्री फिर मीना शहर लौटते हैं.

उसके बाद वो एक ख़ास जगह पर जाकर सांकेतिक तौर पर शैतान को पत्थर मारते हैं. उसे जमाारत कहा जाता है. अक्सर इसी दौरान भगदड़ मचती है और कई लोग मारे जाते हैं. शैतान को पत्थर मारने के बाद हाजी एक बकरे या भेड़ की कुर्बानी देते हैं. उसके बाद मर्द अपना सर मुड़वाते हैं और महिलाएं अपना थोड़ा सा बाल काटती हैं.

उसके बाद यात्री मक्का वापस लौटते हैं और काबा के सात चक्कर लगाते हैं जिसे धार्मिक तौर पर तवाफ़ कहा जाता है. इसी दिन यानी ज़िल-हिज की दस तारीख़ को पूरी दुनिया के मुसलमान ईद-उल-अज़हा या बक़रीद का त्यौहार मनाते हैं.

आज़ाद भारत में पहली बार, 2018 में 1 लाख 75 हजार हाजी हज मुकम्मल कर पाएंगे ! हज यात्रियों का सफर 45 दिनों का होता है ! भारत के ज्यादातर राज्यों में हज यात्रा 14 जुलाई शुरू हो चुका।  भारत के ज्यादातर राज्यों के, हाजियों की वापसी 28 अगस्त को शुरू होगा जो सिलसिला 11 सितंबर चलेगा ! जो 14 जुलाई को जाएंगे उनकी वापसी 28 अगस्त को होगा, इस तरह से उनका सफर 45 दिनों का होगा !

भारत सरकार ने हज सब्सिडी को पूरी तरह खत्म कर दिया है ! अब भारतीय मुसलमानों को हज यात्रा के लिए किसी भी तरह से आर्थिक मदद सरकार से नहीं मिलेगा ! वर्ष 2018 में पूरे भारत से 1 लाख 75 हजार लोगों को हज करने का मौका मिलेगा ! जिसके लिए 3 लाख 55 हजार लोगों ने हज यात्रा के लिए फॉर्म भरे थे ! आने वाले वर्षों के लिए हज कोटा 1 लाख 75 हजार से बढ़ाकर 1 लाख 80 हजार कर दिया गया है !

वर्ष 2019 से या आने वाले वर्षों में हज यात्रा समुद्री रास्ते से भी शुरू हो सकता है ! समुद्री रास्ते से हज यात्रा के खर्च कमी आने की उम्मीद है ! समुद्री रास्ते से हज यात्रा शुरू होने के बाद भी हवाई रास्ते हज यात्रा जारी रहेगा ! समुद्री रास्ते से हज के खर्चों में 40 हजार से 50 हजार की कमी आ सकता है !

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