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सुप्रीम कोर्ट के आदेश को निलंबित करने के लिए जस्टिस कर्णन ने लगाई राष्ट्रपति से गुहार

नई दिल्ली:  कलकत्ता हाईकोर्ट के न्यायाधीश सी.एस. कर्णन सुप्रीम कोर्ट के छह महीने की सजा सुनाए जाने के आदेश को निलंबित करने के लिए राष्ट्रपति के समक्ष प्रतिवेदन दिया है। यह दावा गुरुवार को उनकी केस की पैरवी करने वाले वकीलों ने की।

उनके वकीलों का कहना है कि संविधान के अनुच्छेद 72 के तहत न्यायमूर्ति कर्णन की तरफ से एक ज्ञापन प्रतिवेदन ईमेल के जरिए राष्ट्रपति को भेजा गया है। इस प्रतिवेदन में कर्णन को सुप्रीम कोर्ट की तरफ से सुनाई गई छह महीने की सजा को निलंबन करने या उस पर रोक लगाने की मांग की गई है।

हालांकि, राष्ट्रपति कार्यालय का कहना है कि वो इस तरह के किसी भी प्रतिवेदन से अवगत नहीं है। गौरतलब है कि जस्टिस कर्णन ने 8 मई को प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति जे.एस. खेहर और छह सदसीय पीठ ने अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति एक्ट के तहत दोषी करार देते हुए पांच साल की सजा का आदेश दिया था।

इसके बाद जस्टिस कर्णन ने कहा था कि सातों जजों ने संयुक्त रूप से 1989 के अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति अत्याचार रोकथाम अधिनियम और 2015 के संशोधित कानून के तहत दंडनीय अपराध किया है।

इससे पहले जस्टिस कर्णन ने चार मई को सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश को मामने से इंकार कर दिया जिसमें उन्हें कोर्ट ते तरफ से मानसिक स्वास्थ्य जांच कराने को कहा गया है। उन्होंने डॉक्टरों के एक दल से कहा था कि वह पूरी तरह सामान्य हैं और मानसिक रूप से स्थिर हैं।

जस्टिस कर्णन ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट के जजों ने जातिगत भेदभाव किया है। उन्हें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अत्याचार अधिनियम, 1989 के तहत दंडित किया जाएगा। इसके बाद उन्होंने कहा कि कि सजा सुनाने वाले न्यायाधीशों ने एक सार्वजनिक संस्थान में मुझे अपमानित करने के अलावा एक दलित न्यायाधीश का उत्पीड़न किया है।

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