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अमित शाह के खिलाफ सोहराबुद्दीन केस को देख रहे जज की मौत की जाँच होनी चाहिए- जस्टिस शाह

दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व चीफ़ जस्टिस एपी शाह ने कहा है कि महाराष्ट्र में दिसंबर 2014 में हुई जज ब्रजगोपाल हरकिशन लोया की मौत की परिस्थितियों की जांच की जानी चाहिए.’द वायर’ को दिए एक इंटरव्यू में जस्टिस शाह ने कहा कि हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश या सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को ख़ुद ये निर्णय करना होगा कि इस मामले में जांच की ज़रूरत है या नहीं, क्योंकि इन आरोपों की जांच न हुई तो न्यायापालिका पर कलंक लग जाएगा.

गौरतलब है कि बृज गोपाल हरकिशन लोया को अक्टूबर 2014 में सोहराबुद्दीन फर्जी एनकाउंटर केस मिला था। उन्होंने अमित शाह को आरोप तय होने तक निजी तौर पर अदालत में हाजिर होने से छूट दे दी थी। लेकिन उन्होंने इस बात पर अपनी नाराजगी का इजहार किया था कि अमित शाह मुंबई में मौजूद होने के बावजूद अदालत में हाजिर नहीं हुए। लोया ने 15 दिसंबर सुनवाई की तारीख तय की थी, लेकिन 1 दिसंबर को उनकी रहसस्यमय मौत हो गई थी या कथित तौर पर उनकी हत्या की गई।

चूंकि मुंबई में सीबीआई स्पेशल कोर्ट के 48 वर्षीय जज बृज गोपाल हरकिशन लोया का स्वास्थ्य अच्छा थे। वह रोज 2 घंटे टेबल टेनिस खेलते थे और उनके परिवार में भी किसी के हृदय रोग से पीड़ित होने का कोई इतिहास नहीं है। उनके लगभग 80 वर्ष के मां-बाप अभी भी जिंदा हैं और स्वस्थ हैं। जज लोया 29 नवंबर 2014 को अपने एक साथी की बेटी की शादी में शामिल होने के लिए नागपुर गए थे और वहां से उन्होंने 30 नवंबर की रात 11 बजे के बाद 40 मिनट तक अपनी पत्नी से अच्छी तरह फोन पर बातचीत की थी। और फिर बताया गया कि 12.30 बजे रात को उनको दिल का जबर्दस्त दौरा पड़ा और उनकी मौत हो गई।

जज लोया अपनी मौत के समय मुंबई में विशेष सीबीआई अदालत के जज थे और नागपुर में एक शादी में हिस्सा लेने गए थे. वो वर्तमान बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह और गुजरात के कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के ख़िलाफ़ सोहराबुद्दीन मुठभेड़ मामले की सुनवाई कर रहे थे.
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उस वक्त बताया गया था कि उनकी मौत दिल का दौरा पड़ने से हुई है. लेकिन हाल ही में जज लोया के परिवार ने ‘द कैरेवन’ नाम की पत्रिका में उनकी मौत के हालात पर कुछ सवाल उठाए हैं. जस्टिस शाह ने वायर को दिए इंटरव्यू में कहा है कि ‘परिवार के आरोपों की जांच न करने से न्यायपालिका को, विशेषकर निचली अदालतों को ग़लत संकेत जाएगा.’

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