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कमल हसन का बयान, नोटबंदी के फ़ैसले पर पीएम मोदी मेरे साथ माँगे माफ़ी

नोटबंदी और जीएसटी जैसे बड़े फ़ैसलों के बाद देश में बहाली की ओर जा रही अर्थव्यवस्था को ले कर भाजपा सरकार बैकफूट पर है। एक बाद एक बयान लगातार मोदी सरकार का होश उड़ा रहे हैं।

इससे पहले देश के पूर्व वित्तमंत्री यशवंत सिन्हा ने मोदी सरकार के नोटबंदी के फ़ैसले की आलोचना की थी और अब देश के मशहूर अभिनेता और दक्षिण भारत के सुपरस्टार कमल हासन ने मोदी सरकार के नोटबंदी के फैसले का समर्थन करने के फैसले को लेकर माफी मांगी है। कमल हासन ने कहा कि मोदी सरकार के इस कदम का समर्थन करने का फैसला उन्होंने हड़बड़ी में किया था, जिसके लिए अब वह माफी मांगते हैं। बता दें कि हासन उन सेलिब्रिटीज में से एक थे, जिन्होंने नोटबंदी का खुलकर समर्थन किया था।

इसके साथ ही कमल हासन ने कहा कि, ‘अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी अपनी गलती मान लें, तो मैं उन्‍हें सलाम करुंगा..।’ उन्होंने लिखा कि मैं अपने समर्थन के लिए माफी मांगता हूं। तमिल मैगजीन विकटन में कमल हासन ने ‘अ बिग अपॉलॉजी’ शीर्षक से लिखे एक कॉलम में उन्होंने यह बात कही है।

उन्होंने कहा कि, “मुझे लगता है कि मुझे लोगों से माफी मांगनी चाहिए, क्योंकि मैंने नोटबंदी का समर्थन किया था। महान अभिनेता ने कहा कि शुरुआत में मुझे लगा था कि यह कदम काले धन पर नकेल कसने के लिए उठाया जा रहा है और लगा था कि इस दौरान लोगों को परेशानी होना जाहिर है।”

उन्होंने आगे लिखा है कि, “मैंने खुद को समझाया। मैंने खुद से कहा कि प्लान तो अच्छा है, हो सकता है इसके क्रियान्वयन में थोड़ी समस्या आ गई हो।” कमल ने लिखा कि अगर पीएम मोदी भी इस गलती के लिए माफी मांगने को तैयार हैं, तो मैं उन्हें एक और बार फिर सलाम करूंगा। उन्होंने कहा कि एक अच्छे नेता की पहचान है कि वह अपनी गलतियों का मानें। गांधी जी ऐसा करने में सक्षम थे।

नोटबंदी की तारीफ कर चुके कमल हासन ने अपने फैसले पर यूटर्न लेते हुए कहा कि, ‘अपनी गलती मानना और उसे सुधारना अच्‍छे राजनैतिज्ञ की पहचान है।’ बता दें कि पिछले साल 8 नवंबर को देश में लागू हुई नोटबंदी के बाद कमल हासन ने ट्वीट कर खुलकर समर्थन किया था। अपने ट्वीट में उन्होंने लिखा था, ‘मिस्‍टर मोदी को सलाम। इस कदम की सारी राजनीतिक विचारधाराओं से ऊपर उठकर तारीफ होनी चाहिए, ये टैक्स पेयर्स के लिए बड़ा कदम है।’

बता दें कि पीएम मोदी ने पिछले साल 8 नवंबर 2016 को नोटबंदी की घोषणा की थी। नोटबंदी का एलान होते ही 500 और 1000 रुपये के नोट को चलन से बाहर कर दिया गया था। नोटबंदी के कदम के समर्थन में सरकार ने कहा था कि इससे कालेधन, भ्रष्टाचार और नकली मुद्रा पर लगाम लगेगी। लेकिन रिजर्व बैंक द्वारा 90 फीसदी पुराने नोट बैंकों में वापस आने वाले बयान के बाद सरकार के दावों पर कई सवाल उठ रहे हैं।

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