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गोलवलकर के विनाशकारी और जहरीले विचारों वाली ‘संघ परिवार का षड्यंत्र’ पुस्तक का विमोचन

बेंगलूरू। प्रसिद्ध दर्शक वी. राजेंद्रन द्वारा कन्नड़ पुस्तक ‘संचुगारा संघ परिवार’ नामक किताब का शनिवार को कन्नड़ भवन में आयोजित एक कार्यक्रम में विमोचन किया गया। किताब का नाम ‘संघ परिवार का षड्यंत्र’ है जिसको मूल रूप से राजेंद्रन द्वारा तमिल में लिखा गया था और सुश्री काली सेल्वी द्वारा कन्नड़ में अनुवाद किया गया है। 300 पन्नों वाली यह किताब एम.एस. गोलवलकर के विनाशकारी और विषैले विचारों का दस्तावेज है।

शहर के कन्नड़ भवन में प्रसिद्ध कन्नड़ लेखक मारूसिद्दप्पा द्वारा इस पुस्तक का विमोचन किया गया। पहली प्रति प्राप्त करने वालों में कन्नड़ के पत्रकार अग्नि श्रीधर, कन्नड़ साप्ताहिक अग्नि राज्य सभा के सांसद और कांग्रेस के राजनेता बी के हरिप्रसाद थे। इस अवसर पर हरिप्रसाद ने कहा कि आरएसएस एक ‘अफवाह स्प्रेडिंग सोसाइटी’ है जो कि संविधान का विरोध करता है और समाज में सभी के लिए समानता में विश्वास नहीं करता है।

उन्होंने कहा कि वे हिंदी क्षेत्रों में अपनी जड़ें मजबूत करने में सक्षम थे। हरिप्रसाद ने कहा कि आरएसएस आरक्षण नीति का विरोध करता है जिसने एससी, एसटी और ओबीसी के लिए एक स्तर का खेल बना दिया है। हरिप्रसाद ने कहा कि कुछ लोगों द्वारा नियंत्रित मीडिया पक्षपात अपना रही है। हरियाणा में दलित लड़की के बलात्कार और हत्या (भाजपा के शासन में) को दबाया जा रहा है, जबकि कांग्रेस सरकार के खिलाफ जन-विवाद पैदा करने के लिए निर्भया बलात्कार काण्ड किया गया।

उन्होंने कहा कि कर्नाटक दक्षिण कन्नड़ जिले में हिंदुओं की अधिकांश हत्याओं ने बजरंग दल के कार्यकर्ताओं द्वारा समुदायों के बीच विसंगति पैदा करने के लिए प्रतिबद्ध किया था। ऐतिहासिक दस्तावेजों का हवाला देते हुए हरिप्रसाद ने कहा कि सावरकर ने ब्रिटिश औपनिवेशिक प्रशासन से क्षमा मांग ली थी ताकि वह अंडमान जेल से रिहा हो सके। इस भयावह कृत्य के लिए उसे कैसे ‘वीर’ कहा जा सकता है?

जाने वाले पत्रकार अग्नि श्रीधर ने कहा कि पुस्तक संघ परिवार को फिर से परिभाषित करती है और समाज को विभाजित करने वाले फासीवादियों से निपटने के लिए उपकरण को नया रूप देने के लिए एक आम भारतीय को प्रेरित करती है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम में आरएसएस का कोई भूमिका नहीं थी।

कोरेगांव-भीमा में दलितों पर हमले का हवाला देते हुए आरएसएस ने दलित और अनुयायियों को डॉ बाबासाहेब अंबेडकर के विचारों को दबाने के लिए काम किया था। संघ परिवार टीपू सुल्तान को लेकर दुर्व्यवहार कर रहे हैं जिन्होंने ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के खिलाफ चार युद्ध लड़े थे। उन्होंने कहा कि लोग उनके खानपान संबंधी विकल्पों के लिए स्वतंत्र हैं। इसमें वैदिक संस्कृति द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों और सीमाओं पर प्रकाश डाला गया है।

(वरिष्ठ पत्रकार मक़बूल अहमद सिराज की रिपोर्ट)

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