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बूचड़खानों पर कारवाई के बाद दो दिन से भूखें हैं कानपुर चिड़ियाघर के सैकड़ो जानवर

कानपुर: बूचड़खानों की बंदी का असर कानपुर चिड़ियाघर के शेर-शेरनी पर भी पड़ा है। शेरों को खाने के लिए गोश्त नहीं मिल रहा है। नतीजतन कानपुर चिड़ियाघर के जानवर गुरूवार काे भूखे रहे।

हालाँकि यहां बुधवार को बीफ (भैंस का मांस) की व्यवस्था हो गई थी लेकिन गुरुवार को मीट न मिलने से शेर-शेरनी, तेंदुआ, बाघ, सियार और लकड़बग्घा समेत करीब 100 मांसाहारी जानवर दिन भर भूखे रहे। बीते कल इस पर कानपुर चिड़ियाघर पहुंचे वन विभाग के प्रमुख सचिव संजीव सरन ने चिंता जताई।

दरअसल कानपुर प्राणि उद्यान के मांसाहारी जानवरों के लिए 180 किलो मीट की रोजाना जरूरत होती है। कानपुर महानगर निगम (केएमसी) के सभी चार बूचड़खानों को बंद कर दिया गया है, जिसकी वजह से जानवरों के लिए मांस का इंतज़ाम नहो हो सका। दो दिन से कानपुर चिड़ियाघर में मांस सप्लाई ठप्प होने से सौ से अधिक जानकारों को भोजन नसीब नहीं हुआ है।

बता दें कि कानपुर चिड़ियाघर के पशु पक्षियों के लिये भोजन की आपूर्ति एक ठेकेदार द्वारा की जाती है लेकिन अवैध बूचड़खानों को सील किये जाने के बाद से वो केवल शाकाहारी फूड सप्लाई कर पा रहा है। एक शेरनी इस समय गर्भवती है और जल्द ही उसे खाना नहीं मिला तो उसकी जान पर बन सकती है। चिड़ियाघर के डाक्टर इन गर्भवती जानवरों को अतिरिक्त विटामिन और टानिक उनके भोजन में मिलाकर देते थे और अब वो भी बन्द हो गया है।

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