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कासगंज: चंदन को भगवा ने मारा, लिखने वाली लेडी अफसर पर गिरी गाज, योगी सरकार ने चार्ज से हटाया

कासगंज प्रकरण को लेकर ‘फेसबुक बम’ फोड़ने वाली डिप्टी डायरेक्टर रश्मि वरुण पर आखिरकार गाज गिर ही गई। उन्हें शासन के आदेश पर लखनऊ से संबद्ध कर दिया गया है।

कासगंज प्रकरण को लेकर टिप्पणी करने के बाद डीएम बरेली भले ही बच गए और उन्हें शासन ने अभयदान दे दिया। लेकिन इसी प्रकरण को लेकर फेसबुक पर टिप्पणी करने वाली सांख्यिकी विभाग की डिप्टी डायरेक्टर रश्मि वरुण को शासन ने नहीं बख्शा और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई कर दी।

नियोजन विभाग के प्रमुख सचिव संजीव सरन ने आदेश जारी कर रश्मि वरुण को चार्ज से हटा दिया है और उन्हें लखनऊ मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया है। शासन से आदेश आने के बाद रश्मि वरुण ने सहारनपुर का चार्ज छोड़ दिया है।
डिप्टी डायरेक्टर द्वारा फेसबुक पर की गई टिप्पणी सोशल मीडिया पर वायरल हो गई थी

कासगंज प्रकरण को लेकर ‘फेसबुक बम’ फोड़ने वाली डिप्टी डायरेक्टर रश्मि वरुण पर आखिरकार गाज गिर ही गई। उन्हें शासन के आदेश पर लखनऊ से संबद्ध कर दिया गया है।

कासगंज प्रकरण को लेकर टिप्पणी करने के बाद डीएम बरेली भले ही बच गए और उन्हें शासन ने अभयदान दे दिया। लेकिन इसी प्रकरण को लेकर फेसबुक पर टिप्पणी करने वाली सांख्यिकी विभाग की डिप्टी डायरेक्टर रश्मि वरुण को शासन ने नहीं बख्शा और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई कर दी।

नियोजन विभाग के प्रमुख सचिव संजीव सरन ने आदेश जारी कर रश्मि वरुण को चार्ज से हटा दिया है और उन्हें लखनऊ मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया है। शासन से आदेश आने के बाद रश्मि वरुण ने सहारनपुर का चार्ज छोड़ दिया है।


बता दें की उनकी लिखी हुई पोस्ट सोशल मीडिया पर वायरल हो गई थी  ।   जिसके बाद उन्होंने माफ़ी मांगते हुए पोस्ट को हटा लिया था

उन्होंने लिखा था , यह थी कासगंज की तिरंगा रैली, यह कोई नई बात नहीं है। अम्बेडकर जयंती पर सहारनपुर के सड़क दूधली में भी ऐसी ही रैली निकाली गई थी। उसमें से अम्बेडकर गायब थे या कहिए कि भगवा रंग में विलीन हो गये थे। कासगंज में भी यह ही हुआ। तिरंगा तो शवासन में रहा, भगवा ध्वज शीर्ष पर। जो लड़का मारा गया, उसे किसी दूसरे-तीसरे समुदाय ने नहीं मारा, उसे केसरी, सफेद और हरे रंग की आड़ लेकर भगवा ने खुद मारा। जो नहीं बताया जा रहा वह यह है कि अब्दुल हमीद की मूर्ति पर तिरंगा फहराने की बजाये इस तथाकथित तिरंगा रैली में चलने की जबरदस्ती की गई और केसरिया, सफेद, हरे और भगवा रंग पे लाल रंग भारी पड़ गया।

 

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