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मुस्लिम परिवार ने पड़ोस में रहने वाले 4 अनाथ हिंदू बच्चों को लिया गोद

दक्षिण कश्मीर के लेवदोरा में सद्भावना और भाईचारे की मिसाल देखने को मिली. यहां एक मुस्लिम परिवार ने पड़ोस में रहने वाले 4 अनाथ हिंदू बच्चों को गोद लेने का फैसला किया है.

इन बच्चों की 40 वर्षीय मां बेबी कौल का शनिवार को निधन हो गया था. इससे ठीक एक साल पहले उनके पति का भी निधन हो गया था. वह पेशे से कॉन्ट्रैक्टर थे और काफी समय से डायबिटीज़ से पीड़ित थे. कौल के निधन के बाद उनकी 15 और 16 साल की बेटी के साथ-साथ 15 और 7 साल का बेटा अनाथ हो गए. उनके पास सिर छुपाने के लिए एक छत के सिवाय कुछ नहीं बचा.

बता दें कि कौल को सरकार ने एडहॉक पर एक बैंक में नौकरी दी थी, जिससे वह अपने परिवार का भरण-पोषण कर सके. लेकिन, नौकरी मिलने के तीन महीने बाद ही उनका निधन हो गया. कम उम्र के बच्चों पर दुखों का पहाड़ टूट गया. ऐसे में गांव वालों ने उनकी मदद करने का फैसला किया.

कश्मीर की यह कहानी वहां की सदियों पुरानी हिंदू-मुस्लिम एकता की पुष्टि करता है, जिसकी एक वक्त मिसाल दी जाती थी. कौल के अंतिम संस्कार में सैकड़ों लोग शामिल हुए. कम उम्र के उसके बेटे ने पूरे हिंदू रिति-रिवाजों से अंतिम संस्कार किया. इसके लिए गांव वालों ने फोन पर हिंदू धर्म के लोगों से पूरी जानकारी हासिल की.

पड़ोसी मोहम्मद युसूफ कहते हैं, जब उसके पिता का देहांत हुआ था तो हम लोगों ने 6 क्विंटल चावल और 80 हजार रुपये इकट्ठा किए थे. हम लोगों ने बेटियों के नाम से दो अकाउंट खोला था और उसमें 55 हजार रुपये जमा किए थे. हम लोगों ने उनके घर को भी ठीक कराया था. हम इसे दोबारा करना चाहते हैं.

उनके चार बच्चों में मीनाक्षी सबसे बड़ी है. जब उसका भाई 9वीं में था तभी उसने स्कूल छोड़ दिया था. दूसरी बेटी सपना भी स्कूल में पढ़ती है. सबसे छोटा रोहित तीसरी क्लास में पढ़ता है. रोहित इस त्रासदी को अभी पूरी तरह समझ नहीं पा रहा है. बच्चों ने पिता का जिक्र करते हुए कहा, वह गांव छोड़ना कभी नहीं चाहते थे. उनकी आंटी ने उन्हें जम्मू के जगती गांव जाने के लिए बहुत कहा. बहुत सारे लोग अब भी उस कैंप में रह रहे हैं, क्योंकि सरकार वहां परिवारों को राहत सामग्रियां उपलब्ध कराती है.

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